इन्हीं मुद्दों को लेकर 16 अप्रैल से सतना से एक बड़ा आंदोलन शुरू होने जा रहा है। इस कार्यक्रम में उन पीड़ित परिवारों की आवाज उठेगी, जिन्हें आज तक न्याय नहीं मिल पाया है।
यह मुहिम अखिल भारतीय हिन्द क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश त्रिपाठी की अध्यक्षता में आयोजित की जा रही है। इस आंदोलन का उद्देश्य देशभर में करोड़ों की संख्या में लंबित पड़े मुकदमों को एक वर्ष के भीतर समाप्त करवाने की दिशा में पहल करना है।
यह यात्रा 16 अप्रैल से शुरू होकर सतना से दिल्ली तक और देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचेगी, जहां न्याय दिलाने के लिए जनजागरण किया जाएगा।
अब सवाल यह उठता है— क्या न्यायाधीश, अधिवक्ता, जांच एजेंसियां, जनप्रतिनिधि, लोक सेवक और शासकीय कर्मचारी—क्या ये सभी विधि के दायरे से बाहर हैं?
क्या इनके लिए विधि का ज्ञान आवश्यक नहीं है?
जिम्मेदारों से यह भी पूछा जा रहा है कि जब कोई व्यक्ति अपने परिश्रम के बदले पारिश्रमिक लेने का हकदार है, तो फिर ऐसे लोगों पर वर्षों तक मुकदमे लंबित रखना—क्या यह न्याय है?
देश में ऐसे हजारों-लाखों मामले हैं, जहां लोगों को न्याय नहीं मिल रहा, बल्कि मुकदमों में उलझाकर उनका शोषण किया जा रहा है।
इस आंदोलन का संकल्प सिर्फ न्याय दिलाना ही नहीं, बल्कि लंबित मुकदमों को पूरी तरह समाप्त कराना भी है।


