कटनी।31 जनवरी से रंगनाथ मंदिर परिसर, कटनी में आयोजित होने जा रही पूज्य पंडित इंद्रेश उपाध्याय महाराज जी की सप्तदिवसीय श्रीमद् भागवत कथा को लेकर नगर में उत्साह, श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना हुआ है। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र, अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कथावाचक पूज्य गुरुदेव का कटनी आगमन स्वयं में नगर के लिए सौभाग्य का विषय है।
हाल के दिनों में पूज्य गुरुदेव के ठहराव को लेकर कुछ अनावश्यक और भ्रामक चर्चाएं सामने आई हैं, जिनका उद्देश्य केवल भ्रम फैलाना प्रतीत होता है। यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि संत-महात्मा किसी व्यक्ति की पहचान, पूर्वाग्रह या सामाजिक चर्चाओं के आधार पर नहीं, बल्कि श्रद्धा, सेवा और भाव के आधार पर ठहरते हैं।
पूज्य पंडित इंद्रेश उपाध्याय महाराज जी का जीवन स्वयं इस बात का प्रमाण है कि वे जाति, वर्ग, धन, प्रतिष्ठा या किसी भी सांसारिक लेबल से ऊपर उठकर केवल प्रभु भक्ति और सत्संग को महत्व देते हैं। उनके लिए हर वह स्थान पवित्र है जहाँ राम-नाम, कृष्ण-कथा और निष्काम सेवा का भाव हो।
श्री रंगनाथ सेवा समिति द्वारा की गई सभी व्यवस्थाएं पूज्य गुरुदेव की सुविधा, सुरक्षा और संत मर्यादा को ध्यान में रखकर की गई हैं। किसी भी प्रकार की व्यवस्था को लेकर संतों की गरिमा पर प्रश्न उठाना न केवल अनुचित है, बल्कि यह लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला भी हो सकता है।
यह भी स्मरणीय है कि श्रीमद् भागवत कथा का उद्देश्य समाज को जोड़ना, शुद्ध करना और प्रभु की ओर उन्मुख करना होता है, न कि किसी व्यक्ति विशेष के अतीत या चर्चाओं को आधार बनाकर विवाद खड़ा करना।
कटनी नगर स्वयं को सौभाग्यशाली मानता है कि यहाँ पूज्य गुरुदेव जैसे महापुरुष का सानिध्य प्राप्त हो रहा है। अब समय है कि सभी प्रभु भक्त मिलकर कथा का आनंद लें, भक्ति में डूबें और सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार करें।
संतों की आभा किसी स्थान से नहीं, उनके तप, त्याग और दिव्य विचारों से होती है—और वह आभा अडिग, अटल और अविचल होती है।
📌 हमारा उद्देश्य केवल सत्य, संत-सम्मान और जनभावनाओं की रक्षा करना है।


