छिन्दवाड़ा/24 नवंबर 2025/ कभी-कभी जीवन की सबसे कठिन घड़ी ही सबसे बड़ी उम्मीद लेकर आती है। जिले के विकासखंड परासिया के ग्राम तीतरा की गर्भवती महिला श्रीमती शिवांगी पति श्री आकाश कुशवाह की कहानी भी कुछ ऐसी ही है—जहाँ गंभीर चुनौतियों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की सूझबूझ, सतर्कता और टीमवर्क ने एक मां और उसके नवजात को सुरक्षित जीवन दिया है।
उम्मीद की लौ बुझने से पहले, किसी का हाथ थाम लेना ही चमत्कार कहलाता है – तीसरी गर्भावस्था में प्रवेश करने के साथ ही श्रीमती शिवांगी की स्थिति अत्यंत संवेदनशील हो गई थी। दूसरे गर्भपात के केवल एक माह बाद ही गर्भवती होने के कारण उन्हें हाई-रिस्क गर्भवती के रूप में चिन्हांकित किया गया था। प्रारंभिक जांचों में उनका हीमोग्लोबिन केवल 8.5 ग्राम पाया गया।
आशा कार्यकर्ता अनीता सूर्यवंशी ने गंभीरता से आपंक जिम्मेदारी निभाते हुए हर 8 से 15 दिन में शिवांगी को परासिया अस्पताल लाकर उनकी जांच व उपचार सुनिश्चित किया। 11 सितंबर 2025 को हीमोग्लोबिन कम होने पर उन्हें आयरन सुक्रोज लगाया गया और फॉलोअप तय किया गया।
अचानक बिगड़ी हालत—जीवन को खतरा- 29 सितंबर को आशा कार्यकर्ता जब घर जाकर स्थिति देखने पहुँची, तो शिवांगी की हालत बेहद गंभीर थी—चेहरे पर सूजन, आंखों में धुंधलापन, अत्यधिक कमजोरी। तत्काल 108 एम्बुलेंस को बुलाकर गर्भवती को परासिया अस्पताल पहुंचाया गया।
जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया – जांच में पता चला कि श्रीमती शिवांगी का हीमोग्लोबिन केवल 1.9 ग्राम रह गया था। गर्भावस्था में यह स्थिति जानलेवा मानी जाती है। परासिया की टीम ने उसे तुरंत जिला अस्पताल रेफर किया, जहाँ 4 यूनिट रक्त चढ़ाया गया। इसके बावजूद हीमोग्लोबिन 4 ग्राम ही रहा। स्थिति गंभीर बनी रही।
नागपुर मेडिकल कॉलेज रेफर… और फिर नई चुनौती- जिला अस्पताल से शिवांगी को 108 के माध्यम से नागपुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जहाँ 2 यूनिट रक्त और 4 यूनिट प्लेटलेट्स लगाए गए। लेकिन इसी बीच शिवांगी का पति अंधविश्वास के कारण बिना सूचना शिवांगी को घर ले आया—जिससे स्थिति और भयावह हो सकती थी।
सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम—सीएचओ, आशा, आंगनबाड़ी, सरपंच व सचिव ने समझाइश दी, पर पति ने जाने से मना कर टीम को वापस लौटा दिया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस की सहायता से महिला को दोबारा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहाँ शिवांगी को फिर से रक्त व प्लेटलेट्स लगाए गए और आईसीयू में रखा गया। पूरी अवधि में आशा कार्यकर्ता श्रीमती अनीता अस्पताल में ही रहकर लगातार देखभाल करती रहीं।
फिर उम्मीद की नई किलकारी गूंजी – स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता और टीम वर्क से 20 नवंबर 2025, शाम 6 बजे, शिवांगी ने सुरक्षित रूप से एक बालक को जन्म दिया। नवजात का वजन 1.9 किलोग्राम है और उसे बेहतर देखभाल के लिये जिला अस्पताल के एसएनसीयु में भर्ती किया गया है। आज मां और बच्चा दोनों पूर्णतः सुरक्षित हैं। यह सफलता स्वास्थ्य विभाग, आशा, सीएचओ, चिकित्सकों व जिला प्रशासन की सतत निगरानी, समर्पण और टीम वर्क का परिणाम है।
“जहाँ विश्वास और सेवा एक साथ चलते हैं, वहाँ जीवन हमेशा जीतता है…”
यह कहानी दर्शाती है कि समय पर चिकित्सा, निरंतर मॉनिटरिंग और स्वास्थ्य कर्मियों की सजगता से किसी भी कठिन परिस्थिति को मात दी जा सकती है।
*संवाददाता शुभम सहारे छिंदवाड़ा*


