उमरियापान | किसानों द्वारा खेतों में नरवाई जलाना एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या बन चुका है। धुआँ न केवल वायु गुणवत्ता को प्रदूषित करता है बल्कि मिट्टी की उर्वरता, जैविक संरचना और आसपास के गाँवों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा दुष्प्रभाव डालता है। यही कारण है कि शासन द्वारा लंबे समय से नरवाई जलाने पर सख्त रोक लगाई गई है। कटनी जिले में कलेक्टर आशीष तिवारी ने साफ निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी किसान द्वारा नरवाई जलाने पर एफ.आई.आर. दर्ज की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।इसके बावजूद ग्राम पंचायत टोला में इन नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं।
*टोला हार में खुलेआम आगजनी, प्रशासन मौन*
ग्राम पंचायत टोला के टोला हार क्षेत्र में लगातार कई दिनों से किसानों द्वारा नरवाई में आग लगाने की घटनाएँ सामने आ रही हैं। खेतों से उठते धुएँ ने पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे आसपास रहने वाले ग्रामीणों को सांस लेने में परेशानी, आँखों में जलन एवं दमघोंटू वातावरण का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि शासन की मनाही के बावजूद यहाँ बिना किसी भय के नरवाई जलाई जा रही है, जबकि प्रशासन को इसकी पूरी जानकारी है। ग्रामीणों का कहना है कि समय-समय पर शिकायतें की गईं, परंतु किसी भी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिली। कलेक्टर के आदेश सिर्फ कागज़ों तक सीमित?कलेक्टर आशीष तिवारी के आदेशों के अनुसार जिले में नरवाई जलाने में लिप्त किसानों पर न केवल जुर्माना लगाया जाना था, बल्कि आवश्यक होने पर कानूनी कार्रवाई करते हुए एफ.आई.आर. दर्ज की जानी थी। लेकिन टोला पंचायत में स्थिति बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। यहाँ प्रशासन की निष्क्रियता कई सवालों को जन्म देती है क्या स्थानीय अधिकारी कलेक्टर के निर्देशों को गंभीरता से नहीं ले रहे? क्या किसी प्रभाव या उदासीनता के चलते कार्रवाई को नजरअंदाज किया जा रहा है? क्या ग्रामीणों की शिकायतें अधिकारियों तक पहुँच ही नहीं रहीं या जानबूझकर अनदेखी की जा रही हैं?
*पर्यावरण पर घातक असर*
नरवाई जलाने से निकलने वाला धुआँ PM 2.5 और PM 10 जैसे सूक्ष्म प्रदूषक कणों को हवा में छोड़ता है, जो हवा को जहरीला बना देते हैं। इनका प्रभाव विशेष तौर पर छोटे बच्चों बुजुर्गों दमा एवं हृदय रोग से पीड़ित लोगों पर सबसे अधिक पड़ता है। टोला हार क्षेत्र में भी इन दिनों हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है, जिससे आसपास के परिवारों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।नरवाई जलाने से मिट्टी में मौजूद लाभकारी कीट, केंचुए और पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, जिससे भूमि की उर्वरता घटती है और किसानों की पैदावार पर भी दीर्घकालीन असर पड़ता है। इसके अलावा लगातार होने वाली आगजनी से जंगलों और घरों में आग फैलने का खतरा भी बना रहता है।
रिपोर्टर राजेंद्र कुमार चौरसिया धीमरखेडा कटनी


