शिक्षा विभाग का डिजिटल तमाशा! मर चुके शिक्षकों को भेज दिया नोटिस – “हाजिरी लगाओ वरना वेतन कटेगा!”
मध्य प्रदेश के रीवा जिले में शिक्षा विभाग की एक ऐसी चूक सामने आई है, जिसने पूरे सिस्टम की डिजिटल समझ पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
ई-अटेंडेंस लागू होते ही विभाग ने ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू की—लेकिन इस जल्दबाजी में ऐसा कारनामा कर दिया कि लोग दंग रह गए।
मौत के बाद भी सरकारी रजिस्टर में ‘ड्यूटी’ पर शिक्षक!
रीवा के सरकारी रिकॉर्ड में तीन ऐसे शिक्षक दर्ज थे, जो महीनों और सालों पहले इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं।
लेकिन ई-अटेंडेंस सिस्टम में वे जब “गैरहाजिर” पाए गए, तो शिक्षा विभाग ने उन्हें भी नोटिस थमा दिया!
सोचिए—जिसके घर वाले दशकों की सेवा के बाद अभी भी आंसू बहा रहे हैं, उसे नोटिस पहुंच गया कि—
“हाजिरी नहीं लगेगी तो वेतन काट लिया जाएगा!”
मरे हुए शिक्षकों से 3 दिन में जवाब माँगा गया
ई-अटेंडेंस ऐप पर रोज़ हाजिरी न लगाने पर विभाग ने 1,500 से ज्यादा शिक्षकों को नोटिस भेजे।
इसी लिस्ट में ये तीन दिवंगत शिक्षक भी शामिल थे:
- देवत दिन कोल – निधन 2023 में
- छोटेलाल साकेत – निधन इसी साल
- रामगरीब दीपंकर – निधन पहले ही हो चुका है
तीनों से कहा गया—
“तीन दिन में बताओ हाजिरी क्यों नहीं लगा रहे हो, नहीं तो वेतन काट दिया जाएगा।”
किसी फ़िल्म की स्क्रिप्ट होती तो शायद लोग हँसते,
लेकिन ये असली जिंदगी की सरकारी गड़बड़ी है।
विभाग बोला – “डेटा अपडेट नहीं हुआ, गलती हो गई”
मामला सामने आते ही जिला शिक्षा अधिकारी राम राज मिश्रा ने इसे डेटा अपडेट की भूल बताया।
सारा दोष क्लस्टर प्रिंसिपलों पर डालते हुए कहा:
“पुरानी एंट्री अपलोड हो गई थी, जल्द ठीक कर रहे हैं। कोई बड़ी गड़बड़ी नहीं।”
लेकिन बड़ा सवाल ये—
अगर कोई जीवित है या मृत—यह जांच तक न करने वाला सिस्टम आखिर कितना पारदर्शी है?
ई-अटेंडेंस: पारदर्शिता या डिजिटल ड्रामा?
शुरुआत में शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस का विरोध किया था।
अब जब यह कड़ाई से लागू हुई, तो सिस्टम की खामियों ने ही मज़ाक बना दिया।
मरे हुए शिक्षकों को नोटिस भेजने का मामला पूरे अभियान को ‘डिजिटल कॉमेडी’ बनाकर खड़ा कर चुका मीडिया सूत्र
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