ग्राम पंचायत परसगांव सर्रा में प्रभारी सरपंच जानकीबाई सतनकर के बेटे द्वारा पंचायत की कुर्सी और कारभार संभालना नियमानुसार पूरी तरह गलत है और यह पंचायत राज एक्ट एवं सरकारी प्रक्रिया का खुला उल्लंघन है। सरपंच के नाम पर कोई अन्य व्यक्ति विशेष रूप से उनका रिश्तेदार या बेटा, पंचायत की सभी जिम्मेदारियां निभाए या बैठक में उनकी कुर्सी पर बैठकर फैसले ले, तो यह अधिकार का दुरुपयोग एवं अवैध कृत्य है जो प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई के दायरे में आता है।नियम क्या कहते हैंपंचायत राज अधिनियम के अनुसार, केवल निर्वाचित या नियुक्त सरपंच ही ग्राम पंचायत के पद पर बैठकर निर्णय ले सकते हैं।किसी पदाधिकारी की अनुपस्थिति में भी उनका निजी संबंधी, जैसे पुत्र, पंचायत के किसी प्रकार के कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर सकता।इस तरह का कृत्य ‘पारदर्शिता’, ‘उत्तरदायित्व’ और ‘लोक सेवा’ मूल्यों के विपरीत होता है।संभावित कार्रवाईइस मामले की शिकायत संबंधित उच्च अधिकारियों (जनपद सीईओ, जिला कलेक्टर, अथवा ग्रामीण विकास विभाग) को लिखित रूप में की जा सकती है।उच्च अधिकारीत जांच समिति गठित कर सकते हैं। यदि तथ्य सही पाए जाते हैं तो प्रभारी सरपंच की नियुक्ति रद्द और दोषियों पर दण्डात्मक कार्रवाई (निलंबन/बर्खास्तगी/एफआईआर) की जा सकती है।पंचायत की कार्यवाही पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे मामलों पर अंकुश लगे।प्रशासन के लिए जरूरी कदमफोटो, दस्तावेज एवं सम्बन्धित साक्ष्यों के साथ प्रकरण की जांच अविलंब की जानी चाहिए।यदि दोष सिद्ध होता है तो पंचायत नियमों के अंतर्गत सख्त प्रशासनिक कार्यवाही तत्काल की जानी चाहिए।इस विषय में जिले के उच्च अधिकारियों अथवा राज्य पंचायत विभाग को तत्काल संज्ञान लेकर उचित जांच और नियम के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
*संवाददाता शुभम सहारे छिंदवाड़ा*


