“जहाँ मरने के बाद भी नहीं मिलता सुकून”**
उमरियापान। कटनी जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत उमरियापान विकास के दावों के बीच भी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रही है। यहाँ के श्मशान घाट की हालत ऐसी है कि ज़िंदगी भर की परेशानियों के बाद इंसान को मौत के बाद भी सम्मान नहीं मिलता। न टीन शेड, न पानी की व्यवस्था, न बैठने की जगह—श्मशान घाट की स्थिति किसी उपेक्षित खंडहर से कम नहीं।
सरकारी रिपोर्टों में उमरियापान को “आदर्श ग्राम पंचायत” बताया जाता है। फाइलों में योजनाएँ स्वीकृत दिखती हैं, खर्च भी दर्शाया जाता है, और अधिकारियों की रिपोर्टों में सभी सुविधाएँ “पूर्ण” दिखाई जाती हैं। लेकिन हकीकत यह है कि श्मशान घाट की वास्तविक दशा आज भी दयनीय और संवेदनहीन तस्वीर पेश कर रही है।
श्मशान घाट की जमीनी हकीकत
स्थानीय लोगों के अनुसार—
- अंतिम संस्कार के लिए टीन शेड उपलब्ध नहीं
- बरसात में चारों ओर कीचड़ और फिसलन
- धूप में शव जलाना तक मुश्किल
- पानी की कोई सुविधा नहीं
- बैठने की उचित व्यवस्था नहीं
- रास्ता कच्चा और दुर्गम
बरसात के दिनों में अंतिम संस्कार करने पहुँचे परिजन शेड के अभाव में इधर-उधर भटकते रहते हैं। अक्सर लोग पेड़ों के नीचे शव रखकर अंतिम संस्कार करने को मजबूर हो जाते हैं। गर्मी में हाल और भी विकट हो जाता है—तेज धूप की वजह से परिजन घंटों तक तपते रहते हैं।
वर्षों से सिर्फ आश्वासन, समाधान नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि कई वर्षों से पंचायत को बार-बार आवेदन दिए गए हैं।
लेकिन—
- पंचायत अधिकारी,
- जनप्रतिनिधि,
- एवं जिम्मेदार विभाग
सिर्फ आश्वासन देते आते हैं। काम शुरू होने का वादा किया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि श्मशान घाट का आधारभूत फाउंडेशन वर्षों पहले बना था, पर आगे का कार्य आज तक अधूरा पड़ा है। गाँव के लोगों को यह भी भय है कि यदि अभी ध्यान नहीं दिया गया, तो स्थिति और भी बदतर हो सकती है।
मानवता पर सवाल
श्मशान घाट किसी भी गाँव की संवेदनशील बुनियादी सुविधा है। यहाँ की दुर्दशा न केवल प्रशासन की उदासीनता को उजागर करती है, बल्कि मानवता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है—
क्या किसी इंसान को मृत्यु के बाद भी सम्मानजनक विदाई का अधिकार नहीं?
ग्रामीणों ने मांग की है कि श्मशान घाट में शीघ्र—
- पक्का शेड,
- पानी की व्यवस्था,
- बैठने की बेंच,
- पक्का मार्ग
निर्माण कराया जाए, ताकि अंतिम संस्कार के समय किसी परिवार को अपमानजनक परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।
रिपोर्टर — राजेंद्र कुमार चौरसिया
धीमरखेड़ा, कटनी


