रीठी में दीपावली के अवसर पर यदुवंशियों द्वारा कार्तिक मास की अमावस्या से छाहुर बांध कर ग्राम के देवी देवताओं को जगाना और प्रतिपदा के दिन ग्राम के समस्त ग्रामवासी एकत्र होकर एकता की मिसाल कायम करते हुए, सनातन परंपरा को जीवंत रखकर बड़े हर्ष उल्लास के साथ यदुवंशियों की प्रथा दीवारी नृत्य जो आज भी ग्राम में डोर और मृदंग की शानदार धुन पर मनमोहक नृत्य की प्रस्तुति करते हुए शोभायात्रा निकाली गई है,जो मेन बाजार से होते हुए बस स्टैंड मैं विराजित गोरैयाबाबा पहुंचकर खेरापति देवता
और गोरैया बाबा की पूजा अर्चना की गई । और हर्षोल्लास के साथ दिवाली नृत्य करते हैं। यह प्राचीन परंपरा आज भी ग्राम में प्रचलित है और हिंदुत्व के सबसे बड़े महापर्व पर ग्रामवासियों द्वारा आपसी भाईचारा और एकता का भाव हमारे सनातन संस्कृति को जोड़ने का काम करता है
हरिशंकर बेन


