कटनी में एक वृद्ध महिला को उनके ही पुत्रों और पुत्रवधू द्वारा घर से बाहर निकालने और मारपीट करने के मामले में न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), कटनी प्रमोद कुमार चतुर्वेदी ने “माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक का भरण पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007” के तहत इस मामले की सुनवाई करते हुये पुत्र एवं पुत्रवधू द्वारा वृद्ध महिला को 10 हजार रूपये का प्रतिमाह भरण-पोषण भत्ता देने का आदेश जारी किया है।
अल्फर्ट गंज कटनी निवासी राजकुमारी पति स्व. उत्तम सिंह ठाकुर ने “माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक का भरण पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007” के तहत न्यायालय में आवेदन करते हुये बताया था कि उनके पुत्र आशीष ठाकुर और शिव सिंह ठाकुर, और पुत्रवधू आरती ठाकुर ने उन्हें जबरन घर से निकाल दिया। वे घर को तोड़कर गोदाम बनाना चाहते हैं। इसके अलावा, वे अक्सर उनके साथ मारपीट करते और उन्हें वृद्धाश्रम जाने के लिए कहते हैं।
न्यायालय में मामले की सुनवाई करते हुये एसडीएम श्री चतुर्वेदी ने आवेदिका (राजकुमारी) और अनावेदकों (पुत्र-पुत्रवधू) दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए गए। हल्का पटवारी की जांच रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों के आधार पर यह पाया गया कि घर आवेदिका राजकुमारी के नाम पर ही दर्ज है।
आवेदिका वृद्ध होने के कारण अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ हैं, जबकि उनके पुत्र और पुत्रवधू अच्छी आय अर्जित करते हैं। उनके बड़े पुत्र शिव सिंह की मासिक आय 25 हजार रूपये, छोटे पुत्र आशीष की 30 हजार रूपये और पुत्रवधू आरती की 10 हजार रूपये है।
इस आधार पर, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्री चतुर्वेदी ने दोनों पुत्रों को आदेश दिया कि वे वृद्ध आवेदिका को हर महीने 10 हजार रूपये का भरण-पोषण भत्ता दें। इसमें से 5 हजार रूपये आशीष और 5 हजार रूपये शिव सिंह ठाकुर को देना होगा। यह राशि हर महीने की 1 से 5 तारीख के बीच देनी होगी।
इसके साथ ही, न्यायालय ने तहसीलदार, कटनी नगर को तत्काल प्रभाव से अनाधिकृत कब्जा हटाकर अनावेदकों को घर से बेदखल करने का आदेश दिया। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया है कि अनावेदक आवेदिका के सम्मान को किसी भी प्रकार से ठेस न पहुंचाएं और उनके स्वास्थ्य और भोजन का उचित ध्यान रखें, ताकि वे अपना शेष जीवन सम्मानपूर्वक व्यतीत कर सकें।


