उन्होंने बताया कि परिग्रह के प्रति आकर्षण या द्वेष की चिंता करना दुख का कारण है और इससे मुक्त होने के लिए अकिंचन धर्म का पालन करना आवश्यक है। मुनिश्री ने कहा कि 24 प्रकार के परिग्रह होते हैं और सभी विकारी भाव परिग्रह की श्रेणी में आते हैं।
*दशलक्षण पर्व के मुख्य बिंदु:*
– *उत्तम अकिंचन धर्म*: परिग्रह को हटाकर अपरिग्रही बनने का महत्व
– *परिग्रह के प्रकार*: 24 प्रकार के परिग्रह होते हैं जो विकारी भाव को बढ़ावा देते हैं
– *परिग्रह का त्याग*: मुनिराज ही परिग्रह का सम्पूर्ण त्याग कर सकते हैं, लेकिन गृहस्थ जीवन में तृष्णा को घटाने का प्रयास करना चाहिए
– *दुख का कारण*: अधिक भोग सामग्री का संचय करना दुख का कारण बनता है
मुनिश्री पदम सागर जी महाराज के प्रवचन के बाद, शांतिधारा करने और अर्द्य चढ़ाने का सौभाग्य मनीष जैन, बड्डे जैन मिलन कटनी और रूंगटा कॉलोनी जैन मंदिर के श्रावक-श्राविकाओं को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन समाजसेवी डॉ. संदीप जैन द्वारा किया गया।
*आगे के कार्यक्रम की जानकारी:*
– उपवास करने वाले श्रद्धालुओं का पाणना जुलूस प्रातः 8:00 बजे महावीर कीर्ति स्तंभ से प्रारंभ होगा और जैन बोर्डिंग हाउस में परिसर में समापन होगा।


