• मुखपृष्ठ
  • नियम एवं शर्ते
  • गोपनीयता
  • खंडन
  • शिकायत/ सुझाव
  • हमारे बारे में
  • संपर्क
No Result
View All Result
Thursday, June 25, 2026
MP NEWS CAST
NEWSLETTER
  • Home
  • हमारा शहर
  • प्रादेशिक ख़बरें
    • मध्यप्रदेश
      • भोपाल
      • अनुपपुर
      • दमोह
      • कटनी
      • सागर
      • उत्तरप्रदेश
        • अयोध्या
        • आगरा
        • कन्नौज
        • कौशांबी
        • चंदौली
        • चित्रकूट
        • जालौन
        • जौनपुर
      • उत्तराखण्ड
        • नैनीताल
      • गुजरात
        • अहमदाबाद
      • राजस्थान
        • भरतपुर
  • पॉलीटिक्स
  • मनोरंजन
  • लाइफ स्टाइल
  • व्यवसाय
  • स्वास्थ्य
  • Home
  • हमारा शहर
  • प्रादेशिक ख़बरें
    • मध्यप्रदेश
      • भोपाल
      • अनुपपुर
      • दमोह
      • कटनी
      • सागर
      • उत्तरप्रदेश
        • अयोध्या
        • आगरा
        • कन्नौज
        • कौशांबी
        • चंदौली
        • चित्रकूट
        • जालौन
        • जौनपुर
      • उत्तराखण्ड
        • नैनीताल
      • गुजरात
        • अहमदाबाद
      • राजस्थान
        • भरतपुर
  • पॉलीटिक्स
  • मनोरंजन
  • लाइफ स्टाइल
  • व्यवसाय
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
MP NEWS CAST
No Result
View All Result
Home मध्यप्रदेश कटनी

स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली : मरीजों को नहीं मिल रहा पोषण आहार, रसोई ठेकेदारों की मनमानी चरम पर

by Manish Gautam Chiefeditor
July 23, 2025
in कटनी
0
स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली : मरीजों को नहीं मिल रहा पोषण आहार, रसोई ठेकेदारों की मनमानी चरम पर
0
SHARES
0
VIEWS
FacebookTwitterWhatsappTelegram

कटनी जिला,की रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पहले से ही चिंताजनक बनी हुई थी, लेकिन अब सामने आ रही खामियां यह स्पष्ट कर रही हैं कि यहां न तो मरीजों की सेहत की फिक्र है, न ही मानवता की। सबसे गंभीर मामला है—मरीजों को मिलने वाले पोषण आहार को लेकर।
सरकार द्वारा मरीजों को बेहतर पोषण देने के उद्देश्य से स्वास्थ्य केंद्रों में भोजन की व्यवस्था की जाती है। लेकिन रीठी स्वास्थ्य केंद्र में यह व्यवस्था कागजों पर ही नजर आती है। सूत्रों के अनुसार, मरीजों को मिलने वाला भोजन उन्हें उनके बेड तक नहीं पहुंचाया जाता, बल्कि रसोई ठेकेदार और उनके कर्मचारी मरीजों को खुद रसोई तक बुलाकर खाना देते हैं।
यह स्थिति तब और भयावह हो जाती है जब कोई मरीज असहाय होता है, या उसके साथ कोई परिजन नहीं होता। ऐसे में वह भूखा ही रह जाता है। सवाल यह है कि जब मरीज बीमार है और बिस्तर पर लेटा हुआ है, तो वह खुद कैसे रसोई तक जाकर भोजन प्राप्त करे?
स्वास्थ्य केंद्र में भोजन वितरण के लिए रसोईकर्मियों की नियुक्ति की गई है। परंतु कई बार यह देखने को मिलता है कि जिन कर्मचारियों की ड्यूटी रसोई में लगाई गई है, वे ड्यूटी पर मौजूद नहीं रहते। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक कर्मचारी लंबे समय से अनुपस्थित है, परंतु उसकी उपस्थिति दर्शा कर वेतन नियमित रूप से जारी किया जा रहा है।
अगर यह आरोप सही हैं, तो यह एक बड़ा वित्तीय और नैतिक भ्रष्टाचार है। ऐसे मामलों में जांच और कार्रवाई की सख्त आवश्यकता है।
स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती मरीजों की हालत पहले ही गंभीर रहती है, और ऐसे में अगर उन्हें समय पर पोषण आहार न मिले, तो उनकी हालत और बिगड़ सकती है। यह स्थिति मानवाधिकारों का उल्लंघन भी कही जा सकती है। इलाज के साथ-साथ पौष्टिक भोजन भी मरीज के स्वास्थ्य लाभ के लिए उतना ही आवश्यक होता है।
सरकार की योजना के तहत मरीजों को विशेष रूप से तैयार भोजन—जैसे दलिया, खिचड़ी, सब्जी, चावल और फल आदि उपलब्ध कराए जाने चाहिए, परंतु रीठी स्वास्थ्य केंद्र में शायद ही यह योजना जमीनी स्तर पर अमल में लाई जाती हो।
इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है? रसोई ठेकेदार, कर्मचारी, या फिर स्वास्थ्य केंद्र का प्रबंधन? यह स्पष्ट नहीं है क्योंकि सभी विभाग एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करते हैं। जब इस विषय पर जानकारी लेने की कोशिश की तो अधिकारियों ने गोलमोल जवाब देकर बात को टालने की कोशिश की।
हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इस पर तत्काल संज्ञान लेकर जमीनी स्तर पर जांच करनी चाहिए। साथ ही यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मरीजों को मिलने वाला भोजन उनके बेड तक पहुंचे और गुणवत्ता में भी कोई समझौता न हो।
स्वास्थ्य केंद्र के भोजन वितरण और रसोई कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर एक स्वतंत्र जांच आवश्यक है। जिला प्रशासन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को इस दिशा में पहल करनी चाहिए। साथ ही जो भी दोषी पाया जाए, उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही होना जरूरी है।
साथ ही, रसोई ठेका देने की प्रक्रिया की भी समीक्षा होनी चाहिए कि क्या संबंधित ठेकेदार तय शर्तों का पालन कर रहा है या नहीं।
स्थानीय नागरिकों में इस लापरवाही को लेकर भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि जब भी वे अपने परिजनों से मिलने अस्पताल जाते हैं, तो उन्हें खाने को लेकर अक्सर शिकायतें सुनने को मिलती हैं। कभी खाना नहीं पहुंचता, तो कभी खाने की गुणवत्ता इतनी खराब होती है कि मरीज उसे खाने से मना कर देते हैं।
सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को निःशुल्क पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने का नियम है। खासकर गर्भवती महिलाएं, प्रसूता, टीबी मरीजों और कमज़ोर वर्ग के मरीजों को विशेष रूप से पोषणयुक्त आहार दिया जाना अनिवार्य है। यह व्यवस्था राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) और मध्यप्रदेश स्वास्थ्य सेवा नियमों के अंतर्गत आती है। यदि इनका पालन नहीं हो रहा है, तो यह कानूनी उल्लंघन भी बन सकता है।
रीठी स्वास्थ्य केंद्र की यह स्थिति बेहद शर्मनाक और चिंताजनक है। ऐसे केंद्र, जो मरीजों की सेवा के लिए बनाए गए हैं, वहां अगर मरीजों को समय पर खाना भी न मिले, तो यह व्यवस्थागत विफलता की पराकाष्ठा है।यह आवश्यक है कि प्रशासन इस ओर गंभीरता से ध्यान दे और दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर जनता के स्वास्थ्य और विश्वास की रक्षा करे। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में कोई भी मरीज भूखा न सोए — यह न सिर्फ नैतिक जिम्मेदारी है, बल्कि संवैधानिक कर्तव्य भी।

हरिशंकर बेन

Share this:

  • Share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp

Like this:

Like Loading…
Manish Gautam Chiefeditor

Manish Gautam Chiefeditor

Next Post
एक दिवसीय रात्रिकालीन धरना प्रदर्शन किया ।

एक दिवसीय रात्रिकालीन धरना प्रदर्शन किया ।

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

© 2020 MP News Cast - Director Manish Gautam.

No Result
View All Result
  • About Us
  • Client Portal
  • Complaints and Feedback
  • Contact
  • Home 1
  • Privacy Policy
  • Privacy Policy
  • Rules and Regulations

© 2020 MP News Cast - Director Manish Gautam.

%d