मध्य प्रदेश में नौ साल से बंद शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति की राह खुलने वाली है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके लिए तैयारी कर ली है।
नौ साल से सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति (प्रमोशन) रुकी हुई थी. इसकी वजह यह थी कि आरक्षण में प्रमोशन को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में था. सरकार ने वहां एसएलपी दाखिल की थी, जिससे प्रमोशन नहीं हो पा रहा था. अब नया प्रमोशन फार्मूला बनवाया गया है और उसे कैबिनेट में मंजूरी के लिए रखा गया है. बताया जा रहा है कि इस फैसले से प्रदेश के लगभग 4 लाख कर्मचारियों को फायदा होगा.
पदोन्नति में रोक के चलते अब तक एक लाख से अधिक कर्मचारी रिटायर हो चुके हैं. सरकार का कहना है कि अब नए फार्मूले से आरक्षित और अनारक्षित दोनों वर्गों को संतुष्टि मिलेगी. इससे करीब 4 लाख कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए 9 साल बाद प्रमोशन का रास्ता खुलेगा.
कैबिनेट में जाने से पहले मुख्यमंत्री स्वयं दो बार इस प्रस्ताव का बारीकी से अध्ययन कर चुके हैं.
अब रिक्त पदों को वर्गों में बांटा जाएगा. जितने पद खाली होंगे, उन्हें SC-ST (16%-20%) और अनारक्षित हिस्सों में बांटा जाएगा. पहले SC-ST वर्ग के पद भरे जाएंगे, फिर बाकी पदों के लिए सभी दावेदारों को मौका मिलेगा. वहीं डिप्टी कलेक्टर जैसे क्लास-1 अधिकारियों के लिए लिस्ट मेरिट और सीनियरिटी दोनों के आधार पर बनेगी. जबकि क्लास-2 और नीचे के पदों के लिए लिस्ट सीनियरिटी के आधार पर बनाई जाएगी. कर्मचारी की गोपनीय रिपोर्ट का अच्छा होना जरूरी है. किसी कर्मचारी की गलती से उसकी रिपोर्ट नहीं बनी है, तो उसका प्रमोशन नहीं होगा. पिछले 7 साल में कम से कम 4 रिपोर्ट ‘A+’ होनी चाहिए या पिछले 2 साल में कम से कम 1 रिपोर्ट ‘आउटस्टैंडिंग’ होनी चाहिए.
पहले से प्रमोशन पा चुके कर्मचारियों को हटाया नहीं जाएगा. रिटायर हो चुके कर्मचारियों को इस नियम का फायदा नहीं मिलेगा. नया नियम उस दिन से लागू होगा जिस दिन इसका नोटिफिकेशन जारी होगा.
सबसे पहले जनजातीय वर्ग के पद भरे जाएंगे, उसके बाद अनारक्षित पदों की पूर्ति की जाएगी. यदि एससी-एसटी वर्ग के लिए आरक्षित पद पर कोई पात्र व्यक्ति उपलब्ध नहीं होता है, तो वह पद रिक्त रहेगा.


