रिपोर्टर सीमा कैथवास
नर्मदापुरम। श्री विद्या ललिताम्बा समिति के तत्त्वाधान में एवं पूज्य गुरुदेव आचार्य सोमेश परसाई के पावन सान्निध्य में आयोजित श्री सवा करोड़ शिवलिंग निर्माण में बुधवार को सप्तम दिवस के अवसर पर पूज्य गुरुदेव ने कहा कि वृद्धाश्रम हमारे देश की परंपरा नही है वृद्धाश्रम का भारत जैसे देश मे होना विडंबना है ।माता पिता को धरोहर है इनके अनुभव का लाभ लेने की आवश्यकता है ।भगवान राम तो स्वयं भगवान थे किंतु प्रातः काल उठ कर माता पिता गुरु की वंदना किया करते थे ।पिता के एक वचन को पूर्ण करने के लिए राज पाठ वैभव त्याग कर वनवास को चले गए थे ।आचार्य श्री ने कहा कि एक बच्चे की प्रथम गुरु तो उसकी माता होती है। माँ बच्चे का पिता से परिवार से और संसार से परिचय कराती है ।माँ भले ही अनपढ़ हो संसार का जो ज्ञान माँ से प्राप्त होता है वो बड़े बड़े ज्ञानी भी नही दे सकते। इसके पश्चात भूतभावन भगवान पार्थिवेश्वर का रुद्राभिषेक किया गया। भगवान को दूध दही आदि नाना प्रकार के दृव्यों से स्नान कराया गया।भगवान का सुंदर श्रृंगार हुआ तत्पश्चात भस्म आरती एवं महाआरती सम्पन्न हुई।


