लोकसभा के चुनावों की तारीख का ऐलान हो गया है. और कुछ जगह नामांकन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है. मध्य प्रदेश के जबलपुर से नामांकन से संबंधित एक अजीब खबर सामने आई है.
यहां नामांकन कराने के लिए एक प्रत्याशी 25000 की चिल्लर लेकर ही नामांकन केंद्र पहुंच गया.
ऑनलाइन सुविधा ना होने के विरोध में लाया चिल्लर
बताया जा रहा है इस प्रत्याशी ने ऑनलाइन सुविधा ना होने के विरोध में इस तरह किया है. बताया जा रहा है कि सबसे पहले सुबह करीब साढ़े दस बजे एक बिल्डर चुनाव फार्म खरीदने के लिए रिटर्निंग ऑफिसर के कक्ष में दाखिल हुआ. उसने ऑनलाइन जमानत राशि जमा करने की बात कही. लेकिन उससे कहा गया कि वो केवल नगद ही जमा कर सकता है ना कि ऑनलाइन.
इस बात से नाराज होकर विनय चक्रवती नाम का ये युवक वहां से चला गया और कुछ देर के बाद पच्चीस हजार के सिक्के लेकर आ गया. इन सिक्कों में एक, दो, पांच और दस रुपए के सिक्के थे. भारतीय मुद्रा किसी भी मूल्य की हो उसे अस्वीकार नहीं किया जा सकता. इस नियम से बंधे कलेक्ट्रेट के अधिकारियों ने सिक्कों को लेना स्वीकार किया और गिनती में लग गए.
एक बड़े बैग में ढेर सारी चिल्लर पैसे देख कर न चाहते हुए भी कर्मचारियों ने करीब आधे घंटे की मेहनत कर सिक्कों को गिना. गिनती के दौरान पता चला कि इसमें 350 रुपए कम हैं. इसके बाद फिर दुबारा सिक्कों की गिनती की गई. कलेक्ट्रेट के कर्मचारियों के सामने ही अपने दोस्तों के साथ मिलकर विनय ने लगभग डेढ़ घंटे तक सिक्कों को गिना.
विनय ने डिजिटल इंडिया पर उठाय सवाल
जबलपुर के यादव कालोनी निवासी 35 साल के विनय चक्रवर्ती को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ना है. विनय का कहना है सालों से देश में भाजपा-कांग्रेस की सरकार राज कर रही है, पर देश से विकास दूर ही नजर आ रहा है. विनय का कहना है कि बड़ी-बड़ी राजनीतिक पार्टियों जैसा पैसा तो उनके पास नहीं है. साथियों ने जो पैसे इकट्ठा करके दिया है उसके ही दम पर चुनाव मैदान में उतर रहे हैं. विनय का कहना है कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डिजिटल इंडिया की बात कर रहे हैं दूसरी तरफ चुनाव में डिजिटल मनी ट्रांसफर की कोई सुविधा नहीं है. इसलिए उनके मित्रों से जब उन्होंने तुरंत नगद पैसे लाने के लिए कहा तो वह चिल्लर ही लेकर आ गए.


