डीईसी, एल्बेंडाजोल एवं आईवरमेक्टिन की सामूहिक दवा का सेवन आज से प्राप्रा रंभ
दवा के साईड ईफेक्ट से न घबराने की सलाह
कटनी – राष्ट्रीय फाईलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम एम.डी.ए, आई.डी.ए मीडिया एडवोकेसी की बैठक शुक्रवार 09 फरवरी को कलेक्टर श्री अवि प्रसाद की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में सम्पन्न हुई। बैठक के दौरान जिला मलेरिया अधिकारी, डी.एच.ओ. डॉ. डी. मोहन्ती मलेरिया सुपरवाईजर पी.के. महार सहित प्रिंट एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकार उपस्थित रहे।
बैठक में बताया गया कि 10 फरवरी से 23 फरवरी 2024 तक फाईलेरिया अभियान चलाया जायेगा इसके संबध में विस्तार से जानकारी प्रदान की गई। इस दौरान एम.डी.ए. एवं आई.डी.ए कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रचार-प्रसार हेतु बनाये गये वीडियो का विमोचन किया गया।
*ऑनलाईन क्विज प्रतियोगिता*
कलेक्टर अवि प्रसाद के मार्गदर्शन में फाइलेरिया (हाथी पांव) उन्मूलन के लिए अभिनव नवाचार किया जा रहा है। ऑन लाईन क्विज का उद्देष्य फाइलेरिया रोग के बारे में जानकारी प्रदान करना है। नागरिकगण फाइलेरिया जागरूकता क्विज में लिंक https://katni.nic.in/event/filaria/quiz/ ओपन कर जबाब दे सकते है। यह लिंक 10 फरवरी से 23 तक शासकीय अवकाश को छोडकर ओपन रहेगी। जिसमें प्रतिदिन तीन विजेता घोषित किये जायेगे। क्विज में प्रथम विजेता को 500 रूपये, द्वितीय विजेता को 300 रूपये व तृतीय विजेता को 200 रूपये पुरस्कार राशि प्रदान की जावेगी।
*10 से 23 फरवरी तक चलेगा अभियान*
जिला मलेरिया अधिकारी नें बताया कि इस वर्ष तीन औषधि पद्वति अपनाकर फाइलेरिया का उन्मूलन कराना शासन का उद्देष्य है। जिसमें डी.ई.सी, एलबेन्डाजोल व आयवरमेक्टिन की गोली का सेवन घर-घर जाकर दवा सेवक अपने समक्ष करायेगे। 10 सें 13 फरवरी 2024 को बूथ लेवल पर सभी षासकीय व अषासकीय षालाओ, कालेज, व कार्यालयों में दवा का सेवन कराया जावेगा। 14 फरवरी से 19 फरवरी 2024 तक दवा सेवक घर-घर जाकर दवा का सेवन करायेगे। 20 से 23 फरवरी मॉपअप दिवस में छूटे हुये लोगो को दवा का सेवन कराया जावेगा। ध्यान रहे यह दवा 02 वर्ष से कम उम्र के बच्चो, गर्भवती महिला व अति गंभीर रोगियों को दवाई का सेवन नही कराना है। फाइलेरिया से बचाव का एक मात्र सरल उपाय दवा सेवक के सामने डी.ई.सी., एल्बेन्डाजोल व आयवरमेक्टिन की गोली का सेवन उम्र के अनुसार कराया जावेगा।
*दवा के प्रभाव*
जिला मलेरिया अधिकारी एवं डी.एच.ओ. डॉ मोहन्ती ने बताया क दवा सेवन के उपरांत जब ये माईक्रोफाइलेरिया मरते है तब कुछ विष (ट्रॉक्सिन) हमारे षरीर में छोडते है जिसके विपरीत प्रभाव उन व्यक्तियों में देखने को मिलेगे जिनमें फाइलेरिया के कृमि माईक्रोफाइलेरिया होगे। जिसके विपरीत प्रभाव में बुखार, उल्टी, जी मचलाना, सरदर्द, शरीर में चक्कते, बदन दर्द जैसे लक्षण देखने को मिलते है जो क्षणिक होते है। ये जानना आवष्यक है कि जिन क्षेत्रो में दवा से विपरीत प्रभाव दिखाई देते है उन क्षेत्रों में फाइलेरिया के कृमि मौजूद है। इस क्षेत्र में संक्रमण होने के कारण और सभी लोगों को दवा खाना आवश्यक है। फाइलेरिया से बचाव का एक मात्र सरल उपाय वर्ष में एक बार दवा सेवक के सामने डी.ई.सी., एल्बेन्डाजोल व आईवरमेक्टिन गोली का सेवन करना है। आपनें नागरिकों से दवा का सेवन कर हाथीपॉव मुक्त कटनी बनाने में सहयोग प्रदान करनें की अपील की है।


