जनसुनवाई बंद होने के बाद सुन रहे समस्याएं
प्रदेश में आचार संहिता लागू होने के साथ ही जनसुनवाई शासन स्तर से बंद हो गई है, लेकिन जनता की परेशानियां को देखते हुए कलेक्टर अभी भी अपने बिजी शेड्यूल से समय निकालकर जनता से मिलने से पीछे नहीं हट रहे। आज भी कुछ ऐसा ही हुआ मंगलवार होने के कारण दूर-दूर से लोग अपनी समस्या लेकर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे थे। कई लोगों को तो यह भी मालूम नहीं था कि आचार संहिता लगने के कारण अब जनसुनवाई नहीं लगेगी, लेकिन अपनी पीड़ा लेकर बड़े आस से कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे लोगों को कलेक्टर श्री प्रसाद ने निराश नहीं किया। बारी बारी करके कलेक्टर काफी देर तक जनता की समस्याएं सुनते रहे और उन्हें हल कराने के प्रयास में जुटे रहे।
सोच को सलाम
आम लोगों की छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर कलेक्टर श्री प्रसाद की भावनात्मक सोच वाकई में काबिले तारीफ है। बच्चों बूढ़ों और दिव्यांगों के लिए उनका प्रेम और भावनात्मक लगाव कई बार देखने को मिला है। लेकिन आचार संहिता के दौरान जनता की पीड़ा सुलझाने के लिए कलेक्टर का यह नया रूप और उनकी सोच को सलाम है। यदि पद पर बैठे प्रत्येक अधिकारी कलेक्टर श्री प्रसाद जैसा जस्ब अपना ले तो फिर जनता की सारी परेशानियां हल होने में चंद मिनट भी नहीं लगेंगे।
सर हमारी पीढ़ियां गुजर गई कटनी में गर्म कपड़ों की दुकान लगाते हुए, हम हर साल कटनी आते हैं और अनुमति लेकर दुकान लगाते हैं, इस बार हमें नगर निगम अनुमति नहीं दे रहा, कहता है आचार संहिता लगी है, आप कलेक्टर साहब के पास जाओ उनसे अनुमति मांगो। जब इस तरह की बातें आज मंगलवार को कलेक्टर अवि प्रशाद ने लोगों की समस्याएं सुनते हुए शहर में गर्म कपड़ों की दुकान लगाने वाले तिब्बति महिलाओं से सुनी तो कलेक्टर श्री प्रशाद ने जरा भी देर किए बिना नगर निगम कमिश्नर विनोद कुमार शुक्ला को फोन के माध्यम से फटकार लगाते हुए कहा कि आचार संहिता लगी है, इसका मतलब यह नहीं होता कि आप अपने रुटीन के काम बंद कर दें। जनता की समस्या सुलझाना आपका काम है। अपने दायित्वों को पूरा करें। कलेक्टर श्री प्रसाद से तुरंत निदान मिलने के कारण व्यापारी महिलाओं ने कलेक्टर श्री प्रसाद का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हम अपनी इस छोटी सी समस्या को लेकर कब से परेशान थे। सिर्फ 1 मिनट के अंदर कलेक्टर साहब ने न केवल हमारी पीड़ा सुनी बल्कि उसको हल भी कर दिया।


