भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हरछठ का त्योहार मनाया जाता है. इसे हलषष्ठी, छठ के नाम से भी जाना जाता है
भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हरछठ का त्योहार मनाया जाता है. इसे हलषष्ठी, छठ के नाम से भी जाना जाता है. यह पर्व बलराम जी को समर्पित है. मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था. ऐसा माना जाता है कि द्वापर युग में श्रीकृष्ण के जन्म से पहले शेषनाग ने बलराम के रूप में जन्म लिया था. हरछठ का व्रत संतान की दीर्घ आयु और उनकी सम्पन्नता के लिए किया जाता है.
माताएं संतान की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और पूजा करती हैं. इस व्रत को करने से पुत्र पर आने वाले सभी संकट दूर हो जाते हैं. हल षष्ठी की पर महिलाएं पुत्र की संख्या के हिसाब से छह मिट्टी के बर्तनों में 6,7 भुने हुए अनाज या मेवा रखती हैं. विधि विधान से हल षष्ठी पर पूजा पाठ करती हैं. हल षष्ठी पर महिलाएं गड्ढा बनाती हैं और उसे गोबर से लीप कर तालाब का रूप देती हैं. इसके बाद झरबेरी और पलाश की एक-एक शाखा बांधी जाती है और हरछठ को गाड़ा जाता है. पूजा के समय भुना हुआ चना, जौ की बालियां भी चढ़ाई जाती हैं. कहा जाता है कि व्रत के दौरान हल जोत कर उगाए अन्न का सेवन नहीं किया जाता. इस तरह पूजा पाठ कर रात्रि में चांद देख कर व्रत खोला जाता है.
पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि की शुरुआत 4 सितंबर 2023 को शाम 04 बजकर 41 मिनट पर हो रही है. इसका समापन अगले दिन 5 सितंबर 2023 को दोपहर 03 बजकर 46 मिनट पर होगा. उदया तिथि को देखते हुए इस साल हलषष्ठी 5 सितंबर 2023 को मनाया जा रहा है.


