मॉडल जिले का मोबाइल नेटवर्क विहीन गांव
उपयोग न होने से कबाड़ में तब्दील हो रहे महंगे मोबाइल
सूचना संचार सेवा के लिए तरस रहे रझाडी पिपला के ग्रामिन
आंदोलन के मूड में ग्रामीण
केंद्र सरकार के डिजिटल भारत पर बड़ा तमाचा
मबाइल संचार सेवा जैसे मूलभूत सुविधस को सालों से तरस रहे ग्रामीण
क्षेत्र के दिग्गज नेताओ को आइना दिखती तस्वीर
चुनाव के बहिष्कार के मूड में ग्रामीण
सोसल मीडिया से कोसो दूर ग्रामीण
सूचना क्रांति के अभाव में शासन की योजनाओ का नही मिलता कोई लाभ
ऑनलाइन पढ़ाई,ऑनलाइन कियोक्स,पेपरलेस बिजली बिल, राशन,लाडली बहना के फार्म भरने जाना पड़ रहा दूसरे ग्राम
100 बुलाना हो, 108,जननी,या आग लगने पर फायर ब्रिगेड बुलाना हो मोबाइल नेटवर्क के कारण नही बुला सकते
जिम्मेदार नही दे रहे कोई ध्यान
एक और जहाँ केंद्र व मध्यप्रदेश सरकार डिजीटल भारत का गुणगान करती थकती नही है वही दूसरी और सालों से इस मोबाइल सूचना क्रांति से दूर लोग गुमनामी की जीन्दगी जीने को मजबूर है,जो सोसल मीडिया,और डिजिटल भारत को तरस रहे है तो जिम्मेदारों को कई बार मोबाइल नेटवर्क टावर लगाने के लिए आवेदन निवेदन कर अब विधानसभा, लोकसभा चूनाब के बहिष्कार के मूड में नजर आ रहे है….
मामला मध्यप्रदेश के मॉडल जिले छिन्दवाड़ा के सौसर तहसील के ग्राम रझाड़ी पिपला का है जहाँ लगभग 2,000 लोगो की आबादी है और खास बात है यह ग्राम मुख्यालय से 20 किलोमीटर की दूरी पर pwd सड़क से लगी हुई है,
किन्तु यह मोबाईल नेटवर्क व सूचना क्रांति से काफ़ी पिछड़ा हुआ ग्राम है जिसके कारण यहाँ न तो लीगों को पंचायत के डिजिटल शासकीय योजनाओ का लाभ तुरत मिल रहा है और नही ही स्वास्थ्य,शिक्षा, आपातकाल पुलिस सेवा का लाभ लोग नही ले पा रहे है….
वही क्षेत्र के कई दिग्गज नेता जो अपने आप को विकास पुरुष बताने में कोई कसर नही छोड़ते लोगों की समस्या पर फिसड्डी सबीत होते नजर आ रहे है जो महज लोगो को लॉलीपॉप देते नजर आ रहे है….
ग्रामिनो का कहना है कि ग्राम में मोबाइल नेटवर्क,टावर नही होने से उनके पंचायत से सम्बधिति सभी ओननाइल कार्य प्रभावित है जिसमे उन्हें यदि राशन लेना हो, लाडली बहना के फार्म भरना हो या शिक्षा से सम्बंधित कोई मेसेज शालाओ में आते है जिसपर वे अमल नही कर पाते,स्कूल कॉलेज के बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई नही कर पा रहे,पेपरलेस बिजली बिल नेटवर्क की वजह से ठप्प हो गए है,कभी इमर्जन्सी में स्वास्थ्य सेवा 108,100 नम्बर की सेवा का लाभ लेना हो तो भी वह नही ले पा रहे,साथ ही डिजिटल भारत की योजना उन्हें कई दिनों बाद पता चलती है….
ग्रामीण कई सालों से जिम्मेदार अधिकारी राजनेतावो के पास ग्राम में मोबाइल के टावर लगाने की मांग को लेकर चप्पल घिस चुके है किंतु जिम्मेदार केवल डिजिटल भारत को केवल कागजो तक सीमित रखने व उसपर धब्बा लगाने में व्यस्त है…
अब देखना है कि 2000 लोगो की इस समस्या का कोई समाधान खबर चलाये जाने के बाद निकल पाता है या फिर लोग सोसाल मीडिया से दूर दुरभाष विहीन कारागृह की जिंदगी जीने को मजबूर रहते है…..
*संवाददाता शुभम सहारे छिंदवाड़ा*
