सीमा कैथवास की रिपोर्ट
नर्मदापुरम। लंबे समय से वकीलों के कार्य से विरत रहने के कारण पक्षकार परेशान है वहीं न्यायिक कार्य भी प्रभावित हो रहे है। बुधवार को अधिवक्ताओं के कार्य से विरत रहने के कारण 455 सिविल एवं अपराधिक प्रकरणों में सुनवाई नहीं हो सकी। नर्मदापुरम अधिवक्ता संघ सचिव मनोज जराठे ने मांग की है कि हाईकोर्ट अधिवक्ताओं और पक्षकारों की समस्या पर शीघ्र ध्यान देकर उनके हितों में निर्णय ले। अधिवक्ता संघ अध्यक्ष केके थापक, उपाध्यक्ष अखिलेश मिश्रा, सहसचिव सुरेन्द्र सिंह राजपूत, ग्रंथपाल श्रीप्रकाश दुबे, कार्यकारणी सदस्य सीके कुरापा, रीतेश विश्वकर्मा, क्षमा चौहान वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप तिवारी, मोरसिंह चौहान, नरेश तिवारी, प्रदीप मिश्रा, एनपी शर्मा, अजय तिवारी, आनंद शर्मा, प्रताप रवि दुबे, रामकुमार दुबे, नीतेश गौर, भूपेन्द्र वर्मा, जितेन्द्र गौर, माधव हर्णे, आशीष ठाकुर, प्रशांत पालीवाल, आशुतोष दुबे, विकास यादव, अनुराग दुबे, ललित अहिरवार, गुमान सिंह मांडले, राहुल तिवारी, प्रमोद यादव, राकेश यादव जितेन्द्र कौशिक, राजेश मालवीय, नीता चौधरी, रिचा तोमर, किशन मीना आदि अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट के आदेश 25 सिविल और अपराधिक प्रकरणों का 66 दिनों में निराकरण करने के आदेश वापस लेने की मांग की है।
