माधव नगर को हरेमाधव धाम में श्रद्धा और भक्ति का अनोखा दृश्य देखने को मिला। हजारों श्रद्धालु जो 9 अक्टूबर को नहीं पहुंच पाए थे, वे प्रातःकाल से ही हजारों संगतें हरेमाधव धाम में सतगुरु दर्शन एवं सत्संग का लाभ प्राप्त करने पहुंचे।
कार्यक्रम की शुरुआत *अरदास* “मेरे सतगुरां हम शरण तेरी आए” से हुई, जिसके पश्चात भजन-राग संकीर्तन और हरे माधव सद्ग्रंथ वाणियों का गायन हुआ। पूरे परिसर में भक्ति और आनन्द छाया रहा हरेमाधव की गूंज वातावरण को पवित्र बना रही थी।
*करुण लीलाओं के चलचित्र से भाव विभोर श्रद्धालु*
कार्यक्रम में एल.ई.डी. स्क्रीन पर सतगुरु बाबा माधवशाह जी और सतगुरु बाबा नारायणशाह साहिब जी की परम उपकारी लीलाओं का चलचित्र प्रस्तुत किया गया। इसमें दर्शाया गया कि सतगुरु सदैव अपने भक्तों के साथ हैं — अदृश्य रूप में भी वे हर क्षण हमारी रक्षा करते हैं। जब हम सतगुरु द्वारा दिए गए अमृत नाम का सिमरन ध्यान का अभ्यास नित्य नियम से करते हैं, तब हमें जीवन की वास्तविक उद्देश्य का बोध होता है। जब जब भक्त पुकारते हैं सतगुरु दौड़े आते हैं शिष्य संगतों का संरक्षण करते हैं
अनादि युगों से समस्त लोक-मंडलों में जीवों के आत्म-उद्धार और कल्याण का मार्ग केवल परम कृपालु, जीवनमुक्त सतगुरु की असीम करुणा से ही प्रकाशित हुआ है। पूर्ण कमाई वाले जीवनमुक्त सतगुरु जब अपनी अगम, अगाध और जीव-उद्धारी लीलाओं का विस्तार करते हैं, तब जीवों पर कृपा और मेहर का ऐसा अनवरत प्रवाह बहता है, जिसका मोल कोई जन्म, कोई संचित पुण्य या संसार का कोई भी वैभव नहीं चुका सकता। उनके दिव्य श्रीवचन हरे माधव और पावन श्रीदर्शन अंतरघट के समस्त संताप मिटाकर उसे पूर्णतः शीतल और निर्मल कर देते हैं। उनकी अपार महिमा हृदय में निष्छल, शुद्ध भगति जगाती है और उनकी दया जीव को समस्त विकारों से मुक्त कर श्रीचरणों की शरण में ला बिठाती है। हरे माधव ऐसे दयालु सतगुरु की पावन लीलाओं को निहारते हुए उनके श्रीचरणों में दासत्व भाव से टिकना, प्रेमा-भगति में अपना सर्वस्व अर्पित करना और उनकी पवित्र चरण-रज को जीवन का परम प्रसाद स्वीकार करना ही जीवात्मा के लिए सबसे बड़ा परम सौभाग्य है।
*भक्त वत्सल जीवनमुक्त सतगुरु की विराट लीलाओं के श्री दर्शन चल चित्र के माध्यम से*
सतगुरु जी संगतों को आत्मबोध करा वास्तविकता का परिचय कराते हैं— जैसे दर्पण में हम अपना चेहरा देखते हैं, वैसे ही सतगुरु हमें हमारा असली स्वरूप दिखाते हैं। वे हमें हमारी आत्मा को स्वपहचान कराते हैं। जीवनमुक्त सतगुरु के प्रत्येक कार्य का उद्देश्य केवल जीवों का कल्याण होता है। जो उनकी महिमा को समझ लेता है, वही उस असीम रहमत का अधिकारी बनता है।
जैसा कि कहा गया है — “गोविंद भाव भगत का भूखा।”
*रहमत की बारिश और अमृत नाम का वरदान*
हरे माधव वर्सी पर्व वह अवसर है जब सतगुरु साहिबान की रहमत की वर्षा हर हृदय को भिगो देती है। यह पर्व आत्मिक जागरण और रूहानी मिलन का प्रतीक है। सतगुरु जीवों पर अमृत नाम की संजीवनी बूटी का वरदान बरसाते हैं, जो जीवन में सच्चा सुख और आत्मिक प्रकाश प्रदान करती है।
*सतगुरु से जुड़ाव ही सच्ची रोशनी*
जैसे बिना तार जोड़े बल्ब नहीं जलता, वैसे ही जब तक हम अपनी जीवन-तार सतगुरु से नहीं जोड़ते, तब तक जीवन में रोशनी नहीं आती। नाम, भक्ति और सेवा ही वह साधन हैं जो हमें उस दिव्य शक्ति से जोड़ते हैं। सतगुरु बताते हैं कि परम हरेमाधव धाम की भाषा शब्दों की नहीं, बल्कि सेवा, सिमरन, ध्यान और भजन-बंदगी की भाषा है — यही आत्मा की सच्ची जुबान है।
*9 और 10 अक्टूबर… ये केवल कैलेंडर की तारीखें नहीं हैं।* इन दो दिवसीय पर्व की प्रतीक्षा की अनुभूति तो उन जीवात्माओं से पूछिए, जो महीनों पहले से ही अपने प्यारे सतगुरु के श्री दर्शन दीदार पाने , पावन लीलाओं देखने और उनके पावन सानिध्य में कुछ पल बिताने के लिए दीवानी-सी होने लगती हैं।
सतगुरु की पावन सान्निध्य में बैठना, उनके पावन श्रीदर्शन करना और उनकी मेहर कृपाओं की अनुभूति करना अपने आप में कितना बड़ा सौभाग्य है,
इस धरती पर सतगुरु के पावन श्रीचरणों सानिध्य में बैठकर उनकी मेहर कृपाओं और उनके दिव्य दर्शन का अवसर मिलना विरले अदभुत आनन्द सुअवसर है
*संगत, समर्पण और आत्म जागृति*
जब हम संगत में बैठते हैं, सतगुरु की शरण में जाते हैं, तो हमारी चेतना जागती है। समर्पण भाव से जुड़े श्रद्धालु मन की अशांति से मुक्त होकर आत्मिक शांति का अनुभव करते हैं। सतगुरु की महिमा और उनकी रहमत के प्रति हर दिल में गहरा कृतज्ञता भाव उमड़ता है।
*सेवा और चिकित्सा , प्रेमभाव का प्रतीक*
9-10 अक्टूबर को बाबा माधव शाह चिकित्सालय में दो दिवसीय नि:शुल्क चिकित्सा शिविर आयोजित किया गया। इसमें कटनी, जबलपुर, नागपुर और रायपुर से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने हजारों जरूरतमंदों को चिकित्सा सेवा प्रदान की। अस्पताल द्वारा नि:शुल्क दवाइयाँ वितरित की गईं, जो सेवा-भाव और मानवीयता का सुंदर उदाहरण रही।
*अपार कृपा की बरसात में डूबा माधव नगर*
9 और 10 अक्टूबर को माधव नगर भक्ति, सेवा और प्रेमभाव की ऊर्जा से आलोकित रहा। हजारों श्रद्धालुओं ने सच्चे प्रेम और विश्वास से हरेमाधव वर्सी पर्व का आनन्दमय लाभ उठाया। पूरे नगर में एक ही भाव गूंज रहा था —
“सतगुरु की रहमत सदा अंग-संग।”
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