आज आप बालाघाट जा रहे हैं। वर्ष 1999 में बालाघाट में तत्कालीन सरकार के एक मंत्री की नक्सलियों ने जिस निर्ममता से घर से बाहर खींचकर हत्या की और उनकी डेड बॉडी को रखकर परेड की, उस समय इन्हें चिंता नहीं हुई। उस समय इनकी उम्र भी बहुत कम नहीं थी। लगभग 30-32 वर्ष की उम्र में ये राजनीति में थे और आपकी माताजी उस समय पूरी राजनीति संभाल रही थीं।
उस बड़ी दुर्घटना के समय आपने यह चिंता नहीं की कि एक बार वहां जाकर हालचाल ले लें, संवेदना व्यक्त कर लें। जब नक्सलवाद अपने चरम प्रभाव में था और आए दिन घटनाएं हो रही थीं, तब भी कभी यह चिंता नहीं की कि वहां जाकर पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करें।
आज जब बालाघाट में बीमारी और विपरीत मौसम की परिस्थितियों के कारण स्थिति अलग है, तब वहां जाना और उस विषय को राजनीतिक रूप देना उचित नहीं है।
मैंने स्वयं प्रभारी मंत्री के नाते वहां देखा है कि नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए देश के गृहमंत्री माननीय श्री अमित शाह जी और हमारे मुख्यमंत्री जी ने पूरा फोकस करते हुए पूरी ताकत के साथ काम किया है। नक्सलवाद पर प्रभावी नियंत्रण के बाद ही हम वहां पहुंचने लगे, सरकार की व्यवस्थाएं वहां पहुंचीं, अधिकारी जाने लगे और लोगों को शहरों तथा कस्बों से जोड़ने का काम हुआ। बैगा समाज के जो लोग पहले बाजारों और कस्बों तक नहीं आते थे, उन्हें भी मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया गया।
ऐसे बदलते हुए परिवेश में सकारात्मक भूमिका निभाने के बजाय यदि कोई राजनीतिक रूप से वातावरण को प्रभावित करने का प्रयास करता है, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं स्पष्ट रूप से कह रहा हूं कि राहुल जी का वहां जाना संवेदना के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिकरण के लिए है। यदि वास्तव में संवेदना की भावना होती, तो पूर्व में हुई ऐसी अनेक घटनाओं के समय भी वे वहां पहुंचते और पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते।
मैं यह बात पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि वर्ष 2014 के बाद जब माननीय प्रधानमंत्री जी ने देश का नेतृत्व संभाला, तब आतंकवाद और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं पर नियंत्रण के लिए जिस ताकत और गंभीरता के साथ काम हुआ, वह महत्वपूर्ण है। हम इसके लिए उनका धन्यवाद करते हैं। नक्सलवाद के खिलाफ भी केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से प्रभावी कार्रवाई हुई है।
ऐसे समय में जब सकारात्मक बदलावों की प्रशंसा और समर्थन होना चाहिए, तब राजनीतिक कारणों से वातावरण को खराब करने का प्रयास नहीं होना चाहिए। जब चिंता करने का समय था, तब चिंता नहीं की गई और आज बदली हुई परिस्थितियों में राजनीतिक मुद्दा बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
– *श्री उदय प्रताप सिंह, कैबिनेट मंत्री*


