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*सीएम डॉ. मोहन ने 41 हजार करोड़ रुपये के कार्यों को दी स्वीकृति, जानें कैबिनेट ने और क्या-क्या लिए निर्णय?

by Manish Gautam Chiefeditor
September 1, 2026
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*सीएम डॉ. मोहन ने 41 हजार करोड़ रुपये के कार्यों को दी स्वीकृति, जानें कैबिनेट ने और क्या-क्या लिए निर्णय?
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*वीबी जी राम जी योजना के लिए 29 हजार 619 करोड़ रूपये का अनुसमर्थन*
– *भोपाल-जबलपुर और उज्जैन में प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय को स्वीकृति*
– *कृषकों से मूंग की उपज का 60 प्रतिशत तक का उपार्जन किए जाने वाले निर्णय का अनुसमर्थन*

भोपाल। मध्यप्रदेश के डॉ. मोहन यादव ने 1 सितंबर को कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसलों पर मुहर लगाई। उनकी अध्यक्षता में कैबिनेट ने प्रदेश के सर्वांगीण विकास और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लगभग 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक के महत्वपूर्ण वित्तीय प्रस्तावों और जन-कल्याणकारी निर्णयों को स्वीकृति दी। कैबिनेट ने “विकसित भारत (ग्रामीण): वीबी जी राम जी विकसित भारत जी राम जी योजना मध्यप्रदेश” और इसके 1 जुलाई 2026 से प्रभावशील किए जाने का अनुसमर्थन किया। योजना के कार्यान्वयन के लिए वित्तीय वर्ष 2026-2027 में अनुमानित लागत रुपये 3,183 करोड़ रुपये और वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक योजना की निरंतरता के लिए कुल अनुमानित लागत 26,436 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रस्ताव का अनुसमर्थन किया गया।

केंद्र और राज्य का अंश 60:40 के अनुपात में होगा, जिसमें राज्यांश 10 हजार 574 करोड़ रुपये होगा। इन पांच वर्षों में प्रशासनिक व्यय के लिए 946 करोड़ रुपये का व्यय होगा, जो राज्य शासन वहन करेगा। निर्णय अनुसार नई योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत परिवारों के इच्छुक वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में अब 100 दिन के स्थान पर 125 दिनों के श्रमजन्य रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान की जाएगी। रोजगार के दिनों में की गई यह वृद्धि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसरों को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी। नई योजना का मुख्य आधार ‘विकसित भारत @2047’ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप ग्रामीण बुनियादी ढांचे को तैयार करना है। अब प्रत्येक ग्राम पंचायत जी आई एस आधारित तकनीक, ‘पीएम गति शक्ति’ लेयर्स और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करके ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ तैयार करेगी।

*हर जिले में एक ‘लोकपाल’ की नियुक्ति*
इन योजनाओं को डिजिटल पोर्टल के माध्यम से ‘विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक’ में समेकित किया जाएगा। योजना के तहत जल सुरक्षा, जलवायु-अनुकूल इंजीनियरिंग, डेटा साइंस और अत्याधुनिक आजीविका मॉडल जैसे तकनीकी कार्यों के प्रभावी संपादन के लिए मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद में एक समर्पित राज्य-स्तरीय परियोजना प्रबंधन इकाई स्थापित की जाएगी। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य में प्राप्त होने वाले वित्तीय आवंटन को पारदर्शी और आवश्यकता-आधारित बनाने के लिए ग्राम पंचायतों को विकास मानदंडों के आधार पर क, ख, ग (A, B, C) श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। योजना में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटल मस्टर रोल और प्रत्येक छह माह में सामाजिक अंकेक्षण को अनिवार्य किया गया है। साथ ही त्वरित शिकायत निवारण के लिए प्रत्येक जिले में एक ‘लोकपाल’ की नियुक्ति की जाएगी, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिकायतों का निराकरण करेंगे। मंत्रि-परिषद ने अंतरिम व्यवस्था के तहत नई परिषद के पूर्ण गठन/पंजीकरण तक वर्तमान ‘मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद’ को ही इस नई योजना के समस्त दायित्वों के निर्वहन के लिए अधिकृत किया है।

*दुग्ध उत्पादकों के हित में फैसला*
कैबिनेट ने प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों के हित में सहकारी प्रणाली और सांची ब्राण्ड को उन्नयन करने के उद्देश्य से 2 हजार 973 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। डेयरी विकास योजना के माध्यम सेआगामी 5 वर्ष में सहकारी दुग्ध समितियों का विस्तार 7331 ग्रामों से बढ़ाकर 26,000 ग्रामों तक किया जाएगा।दुग्ध संकलन को 12 लाख किलोग्राम प्रतिदिन से बढ़ाकर 52 लाख किलोग्राम प्रतिदिन किया जाएगा।दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता को 17.8 लाख लीटर से बढ़ाकर 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन किया जाएगा। दुग्ध पैकेट विक्रय 7 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर 35 लाख लीटर प्रतिदिन लीटर किया जाएगा। कृत्रिम गर्भाधान कवरेज 15% से बढाकर 50% किया जाएगा । एम.पी. स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड एवं संबद्ध दुग्ध संघों के संचालन और प्रबंधन के लिए मध्यप्रदेश शासन, एम.पी. स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन एवं संबद्ध दुग्ध संघों तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के मध्य सहकार्यता अनुबंध (कोलेबोरेशन एग्रीमेंट) 13 अप्रैल 2025 को निष्पादित किया गया है। निष्पादित सहकार्यता अनुबंध के तहत राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा 2 हजार 973 करोड़ की प्रस्तुत डेयरी विकास योजना पर सैद्धांतिक सहमति दी गई है। राज्य शासन द्वारा 500 करोड़ रुपये अधोसंरचना के लिए अनुदान एवं इसके अतिरिक्त भारत सरकार की योजनाओं पर स्वीकृति के अनुरूप अनुमानित 241 करोड़ रूपये का राज्यांश तथा योजना विभिन्न घटकों के क्रियान्वयन की स्वीकृति दी गई है।

*पश्चिम भोपाल बायपास 4-लेन का मय पेव्ड शोल्डर के होगा निर्माण*
कैबिनेट ने पश्चिम भोपाल बायपास 4 लेन मय पेव्ड शोल्डर के लम्बाई 35.61 कि.मी., निर्माण कार्य के लिए हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) अंतर्गत कुल परियोजना वित्तीय लागत 3,225 करोड़ 51 लाख रुपये की पुनरीक्षित स्वीकृति दी। इसके अतिरिक्त निर्माण पूर्व कार्यकलाप की राशि 548 करोड़ 29 लाख रुपये का भुगतान भी राज्य बजट के माध्यम से किये जाने का अनुमोदन किया गया। इस बायपास के निर्माण से जबलपुर और नर्मदापुरम की ओर से इन्दौर आने-जाने वाले वाहनों को भोपाल से नहीं गुजरना पड़ेगा और 21 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। उल्लेखनीय है कि पूर्व में पश्चिम भोपाल बायपास 4-लेन मय पेव्हड शोल्डर सहित हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (40:60) अंतर्गत लम्बाई-40.90 कि.मी. के लिए 2,981 करोड़ 65 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति 4 सितंबर 2023 को प्रदान की गई थी। पश्चिम भोपाल बायपास का एक रेखण भोपाल-जबलपुर मार्ग पर मण्डीदीप के समीप इटायाकलां से प्रारंभ होकर भोपाल-देवास मार्ग के ग्राम फंदा के समीप तक निर्मित किया जाना था, जिसकी लंबाई-40.90 कि.मी. थी। पश्चिम भोपाल बॉयपास क्षेत्र में रातापानी टाईगर रिजर्व घोषित हो जाने, बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में पर्यावरण विभाग के नोटिफिकेशन के प्रभाव का समावेश करने, राज्य पुरातत्व विभाग की प्राचीन धरोहर शिवमंदिर (समसगढ़) एक रेखण पर आने तथा बॉयपास को पूर्वी बायपास से जोड़कर संपूर्ण रिंग रोड बनाने के कारण एक रेखण में परिवर्तन किया गया। एक रेखण में परिवर्तन से परियोजना की लागत में पूर्व स्वीकृति से 8.18 प्रतिशत वृद्धि होने से पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति मंत्रि-परिषद से प्राप्त की गई है। निर्णय अनुसार परियोजना निर्माण लागत का 40 प्रतिशत 599 करोड़ 44 लाख रुपये का भुगतान कंसेशन अनुबंध में निर्धारित माइलस्टोन प्राप्त करने पर 10 किश्तों में एवं नेट पॉजिटिव कॉज की राशि का भुगतान निर्माण अवधि में अनुबंध के प्रावधानों के अनुसार, राज्य राजमार्ग निधि के माध्यम से किया जाएगा। परियोजना निर्माण लागत की शेष 60% राशि रुपये 1,910 करोड़ 42 लाख रुपये का भुगतान एन्यूटी, ओएण्डएम एवं ब्याज सहित संचालन अवधि में 15 वर्षों तक छः माही एन्यूटी के रूप में राज्य बजट के माध्यम से किया जाएगा।

*3 नए प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने की स्वीकृति*
कैबिनेट ने प्रदेश में तकनीकी शिक्षा के संवर्धन, क्षेत्रीय संतुलन और अधोसंरचना की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए वर्तमान राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) भोपाल के स्थान पर अब राज्य में 3 पृथक प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने की स्वीकृति दी है। ये विश्वविद्यालय भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में स्थापित होंगे। इस व्यवस्था के तहत भोपाल स्थित वर्तमान विश्वविद्यालय को ‘मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय’, उज्जैन के स्वशासी इंजीनियरिंग कॉलेज को ‘मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय’ तथा जबलपुर के स्वशासी इंजीनियरिंग कॉलेज को ‘महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय’ के रूप में स्थापित किया जाएगा। वर्तमान में आरजीपीवीअंतर्गत 13 पाठ्यक्रम, 585 संस्थाए और 3 लाख 83 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। स्वीकृत व्यवस्था के अंतर्गत प्रदेश के सभी तकनीकी महाविद्यालयों को संभागवार विभाजित कर नवीन गठित तीन विश्वविद्यालयों के क्षेत्राधिकार में सौंपा गया है। भोपाल स्थित ‘मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय’ के अधीन भोपाल, नर्मदापुरम, चंबल और ग्वालियर संभाग आएंगे। उज्जैन स्थित ‘मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय’ के अंतर्गत उज्जैन और इंदौर संभाग रहेंगे। इसी प्रकार जबलपुर स्थित ‘महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय’ के क्षेत्राधिकार में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभागों के तकनीकी संस्थान शामिल किए जाएंगे। तीनों विश्वविद्यालयों के संचालन के लिए पृथक अधिनियम लागू किए जाएंगे। उज्जैन एवं जबलपुर में नवीन स्थापित होने वाले दोनों विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक संचालन के लिए प्रारंभिक स्तर पर कुलगुरु, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, उप कुलसचिव तथा वित्त अधिकारी के पदों को मंजूरी दी गई है। साथ ही अन्य सहायक व तकनीकी पदों को नियमानुसार आउटसोर्स के माध्यम से भरा जाएगा। इन पदों का वेतन आहरण प्रारंभिक रूप से विश्वविद्यालय की उपलब्ध राशि से किया जाएगा और ये संस्थान स्व-वित्तीय आधार पर संचालित होंगे। मंत्रि-परिषद ने तीनों विश्वविद्यालयों की स्थापना एवं अनुवर्ती कार्यवाही को गति देने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय ‘मध्यप्रदेश प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय साधिकार समिति’ के गठन को भी स्वीकृति प्रदान की है। इस समिति में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार, वित्त, उच्च शिक्षा और सामान्य प्रशासन विभाग के सचिवों एवं मध्यभारत प्रौद्योगिकी विश्वद्यालय के कुलगुरु सहित आयुक्त तकनीकी शिक्षा को सदस्य सचिव के रूप में शामिल किया गया है।

*मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग का होगा निर्माण*
कैबिनेट ने मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग लंबाई 67.116 कि.मी., 4-लेन मय पेव्हड शोल्डर के साथ हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) पर निर्माण के लिए कुल परियोजना वित्तीय लागत 2,776 करोड़ 83 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति दी है। अतिरिक्त निर्माण पूर्व कार्यकलाप (भू-अर्जन एवं अन्य कार्य) की राशि 428 करोड़ 94 लाख रुपये तथा सुपरविजन चार्जेस की राशि 65 करोड़ 77 लाख रुपये का भुगतान भी राज्य बजट के माध्यम से किये जाने का अनुमोदन किया गया। मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन परियोजना निर्माण लागत रुपये 1,151 करोड़ है। कुल परियोजना निर्माण लागत की 40 प्रतिशत राशि रुपये 543 करोड़ 27 लाख (जीएसटी सहित) निर्माण अवधि के दौरान भुगतान म.प्र. सड़क विकास निगम द्वारा लिए जा रहे ऋण के माध्यम से तथा कुल परियोजना निर्माण लागत की शेष 60 प्रतिशत राशि 1,738 करोड़ 85 लाख रुपये (जीएसटी सहित) का भुगतान संचालन अवधि में 15 वर्षों तक छः माही एन्यूटी के रूप में राज्य बजट के माध्यम से किया जाएगा। प्रस्तावित मार्ग एन.एच.-346 विदिशा-चंदेरी पर मेहलुआ चौराहा से प्रारंभ होता है एवं बीना में एन.एच-934 हीरापुर-बीना को क्रॉस करते हुये मालथोन में एन.एच-44 नार्थ साउथ कॉरीडोर को जोड़ता है। यह मार्ग क्षेत्रीय, अंतर-राज्यीय एवं औद्योगिक यातायात के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। बीना शहरी क्षेत्र में बीपीसीएल रिफाइनरी, थर्मल पावर प्लांट, रेलवे यार्ड एवं प्रमुख उद्योग स्थित होने के कारण भारी वाहनों की संख्या अधिक है। यह मार्ग भविष्य में एक सशक्त आर्थिक व लॉजिस्टिक कॉरिडोर के रूप में विकसित होने की उच्च क्षमता रखता है।

*स्वास्थ्य संस्थाओं में मशीन एवं उपकरण का अनुरक्षण*
मंत्रि-परिषद ने स्वास्थ्य संस्थाओं में मशीन एवं उपकरण का अनुरक्षण से संबंधित योजना को एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर संचालन के लिए 488 करोड़ 41 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश की चिकित्सा संस्थाओं में प्रदाय किये गये मशीन एवं उपकरणों के रख-रखाव, मरम्मत इत्यादि के कार्य किए जाएंगे। मंत्रि-परिषद ने विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण से संबंधित योजना को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च, 2031 तक निरंतर संचालन के लिए 915 करोड़ 77 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। योजना के अंतर्गत प्रदेश की चिकित्सा संस्थाओं में मॉड्यूलर किचन, मॉड्यूलर ओ.टी. इत्यादि के मरम्मत कार्य किए जाते हैं। मंत्रि-परिषद ने नवगठित जिलों यथा मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के जिला कार्यालय संचालित करने के लिए प्रत्येक जिले में उप संचालक का एक पद, सहायक वर्ग-2 का एक पद एवं सहायक वर्ग-3 के तीन पद सहित कुल 15 नवीन नियमित पद सृजित किए जाने तथा प्रत्येक जिले के लिए चतुर्थ श्रेणी के दो-दो मानव संसाधन कुल 6 आउटसोर्सिंग से रखे जाने की स्वीकृति प्रदान की है।

*निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा एवं मैहर में जिला आयुष कार्यालयों के लिए पदों के सृजन की स्वीकृति*
मंत्रि-परिषद ने नवगठित जिला निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा एवं मैहर में जिला आयुष कार्यालयों के संचालन के लिए 20 पदों के सृजन की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार चार जिला कार्यालयों में जिला आयुष अधिकारी के चार पद वेतन मान 15 हजार 600-39,100-6600 ग्रेड पे, सहायक ग्रेड-1 मुख्य लिपिक के चार पद वेतन मान 5,200-20हजार 200-2800 ग्रेड पे, लेखापाल के चार पद वेतन मान 5,200-20 हजार 200-2,800 ग्रेड पे एवं सहायक ग्रेड-2 के चार पद वेतन मान 5,200-20हजार 200-2400 ग्रेड पे की स्वीकृति दी है। मंत्रि-परिषद ने रबी विपणन वर्ष 2026 में मूंग एवं उडद का 1 जुलाई 2026 से उपार्जन के लिए मुख्यमंत्री के निर्णय का अनुसमर्थन किया है। उल्लेखनीय है कि रबी वर्ष 2025-26 (विपणन वर्ष 2026-27) में प्राइस सपोर्ट स्कीम अंतर्गत ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन के लिए मंत्रि-परिषद के 24 फरवरी 2026 के आदेश में पंजीकृत कृषकों से उनकी उपज का 25 प्रतिशत उत्पादन ही उर्पाजित करने के निर्णय को आंशिक रूप से संशोधन करते हुए मूंग का पंजीकृत कृषकों से उनकी उपज का 60 प्रतिशत तक का उपार्जन किया जाने का निर्णय लिया गया था।

Manish Gautam Chiefeditor

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