कटनी: शासकीय योजनाओं और जमीनी पट्टों के नाम पर सीधे-सादे ग्रामीणों को अपने जाल में फंसाकर ठगी करने वाले गिरोह का बड़ा भंडाफोड़ हुआ है। ढीमरखेड़ा तहसीलदार की सीधी पहल और जांच के बाद पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है।
*पट्टा दिलाने के नाम पर 2.17 लाख की वसूली*
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी ग्रामीणों को यह झांसा देते थे कि वे प्रशासनिक अधिकारियों से साठगांठ कर उन्हें शासकीय भूमि का पट्टा स्वीकृत करवा देंगे। सरकारी जमीन का मालिकाना हक मिलने के लालच में आकर कई ग्रामीण इनके बुने जाल में फंस गए। आरोपियों ने अलग-अलग ग्रामीणों से पट्टा बनवाने के एवज में कुल 2,17,000 रुपये की अवैध राशि वसूल कर ली।
जब महीनों बीत जाने के बाद भी किसी भी ग्रामीण को पट्टा नहीं मिला और पीड़ितों को ठगी का अहसास हुआ, तो उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत प्रशासनिक स्तर पर की।
*तहसीलदार की जांच में खुला फर्जीवाड़ा*
शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए ढीमरखेड़ा तहसीलदार नितिन कुमार पटेल ने मामले की प्राथमिक जांच कराई। जांच में ग्रामीणों द्वारा दिए गए पैसे और आरोपियों द्वारा शासकीय पट्टे के नाम पर की गई धोखाधड़ी के पुख्ता प्रमाण सामने आए। इसके बाद तहसीलदार की लिखित रिपोर्ट पर ढीमरखेड़ा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अपराध दर्ज कर लिया।
*नामजद आरोपी और लगीं धाराएँ*
पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को नामजद किया है:
* दीपक लोधी (पिता – अर्जुन लोधी, निवासी – ग्राम कछारगांव बड़ा, थाना ढीमरखेड़ा)
* लक्ष्मण सिंह गौड़ (पिता – कमल सिंह गौड़, निवासी – ग्राम गौरी)
*पंजीबद्ध धाराएं (BNS):*
* धारा 318(4): धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति ऐंठना।
* धारा 336(3) एवं 336(4): कूटरचित या फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर ठगी करना।
* धारा 3(5): एक ही उद्देश्य से कई व्यक्तियों द्वारा मिलकर अपराध को अंजाम देना।


