कटनी (09 अगस्त) – स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त और हर घर तिरंगा अभियान के तहत फहराये जाने वाले राष्ट्रध्वज तिरंगा के लिए भारतीय ध्वज संहिता के नियमों का पालन आवश्यक है। ऐसे में यह बेहद ज़रूरी है कि राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान बनाए रखने के लिए भारतीय ध्वज संहिता के नियमों का पालन किया जाए।
ध्वजारोहण के महत्वपूर्ण नियम
ध्वजारोहण करते समय यह सुनिश्चित किया जाय कि राष्ट्रीय ध्वज फटा हुआ, गंदा या क्षतिग्रस्त न हो। ध्वज आयताकार होना चाहिए और इसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 होना चाहिए तथा इस पर कुछ भी लिखा हुआ नहीं होना चाहिए। अशोक चक्र सफेद पट्टी के ठीक बीच में होना चाहिए और इसमें 24 तीलियाँ होनी चाहिए। झंडास्वतंत्रता दिवस: ध्वज संहिता हमेशा सम्मान के साथ फहराया जाना चाहिए। यह ज़मीन को नहीं छूना चाहिए। यदि झंडा किसी मंच पर फहराया जा रहा है, तो वक्ता का मुँह श्रोताओं की ओर होना चाहिए और ध्वज उसके दाहिनी ओर होना चाहिए। यदि तिरंगे के साथ कोई और झंडा लगाया जा रहा है, तो उसका स्थान तिरंगे के नीचे होना चाहिए।
पेपर से बनें झंडे का प्रयोग जनता द्वारा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसरों, संस्कृति और खेलकुद स्पर्धा पर फहराया जा सकता है। परंतु ऐसे कागज के झंडों को समारोह पूरा होने के पश्चात न तो विकृत किया जाये और न ही जमीन पर फेंका जाय। जहां तक संभव हो ऐसे झंडों का निपटान पूरे गौरव के साथ और निजी तौर पर किया जाय।
ध्वज को उतारने और सुरक्षित रखने के नियम
तिरंगे को उतारते समय भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए ताकि उसका अपमान न हो। झंडे को उतारते समय वह किसी भी प्रकार से ज़मीन को नहीं छूना चाहिए और न ही गिरना चाहिए। राष्ट्रीय ध्वज को सबसे पहले क्षैतिज रूप से रखें। केसरिया और हरे रंग की पट्टियों को बीच की सफेद पट्टी के नीचे इस तरह से मोड़ें कि सफेद पट्टी के साथ केवल अशोक चक्र ही दिखाई दे। मोड़े हुए झंडे को अपनी हथेलियों पर रखकर एक सुरक्षित स्थान पर रख दें।


