• मुखपृष्ठ
  • नियम एवं शर्ते
  • गोपनीयता
  • खंडन
  • शिकायत/ सुझाव
  • हमारे बारे में
  • संपर्क
No Result
View All Result
Tuesday, July 21, 2026
MP NEWS CAST
NEWSLETTER
  • Home
  • हमारा शहर
  • प्रादेशिक ख़बरें
    • मध्यप्रदेश
      • भोपाल
      • अनुपपुर
      • दमोह
      • कटनी
      • सागर
      • उत्तरप्रदेश
        • अयोध्या
        • आगरा
        • कन्नौज
        • कौशांबी
        • चंदौली
        • चित्रकूट
        • जालौन
        • जौनपुर
      • उत्तराखण्ड
        • नैनीताल
      • गुजरात
        • अहमदाबाद
      • राजस्थान
        • भरतपुर
  • पॉलीटिक्स
  • मनोरंजन
  • लाइफ स्टाइल
  • व्यवसाय
  • स्वास्थ्य
  • Home
  • हमारा शहर
  • प्रादेशिक ख़बरें
    • मध्यप्रदेश
      • भोपाल
      • अनुपपुर
      • दमोह
      • कटनी
      • सागर
      • उत्तरप्रदेश
        • अयोध्या
        • आगरा
        • कन्नौज
        • कौशांबी
        • चंदौली
        • चित्रकूट
        • जालौन
        • जौनपुर
      • उत्तराखण्ड
        • नैनीताल
      • गुजरात
        • अहमदाबाद
      • राजस्थान
        • भरतपुर
  • पॉलीटिक्स
  • मनोरंजन
  • लाइफ स्टाइल
  • व्यवसाय
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
MP NEWS CAST
No Result
View All Result
Home top

*असंभव को सीएम डॉ. मोहन ने किया संभव, UCC को कैबिनेट ने दी मंजूरी, जानें लिव-इन के लिए क्या हैं शर्तें?* – *जगदीशपुर में हुई ऐतिहासिक कैबिनेट मीटिंग* – *तीन तलाक-हलाला से जुड़े मामले अब अपराध की श्रेणी में* – *अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होगी समान नागरिक संहिता* – *प्रदेश के मुखिया ने कैबिनेट के बाद खुद दी यूसीसी की जानकारी*

by Manish Gautam Chiefeditor
July 19, 2026
in top
0
*असंभव को सीएम डॉ. मोहन ने किया संभव, UCC को कैबिनेट ने दी मंजूरी, जानें लिव-इन के लिए क्या हैं शर्तें?*  – *जगदीशपुर में हुई ऐतिहासिक कैबिनेट मीटिंग* – *तीन तलाक-हलाला से जुड़े मामले अब अपराध की श्रेणी में* – *अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होगी समान नागरिक संहिता* – *प्रदेश के मुखिया ने कैबिनेट के बाद खुद दी यूसीसी की जानकारी*
0
SHARES
143
VIEWS
FacebookTwitterWhatsappTelegram

MP NEWS CAST मनीष गौतम

https://www.mpnewscast.com/wp-content/uploads/2026/07/km_20260719-1_360p_30f_20260719_154926.mp4

भोपाल। मध्यप्रदेश के लिए 19 जुलाई का दिन ऐतिहासिक रहा। अब राज्य में किसी के लिए कोई विशेष कानून नहीं होगा। सभी धर्मों के लोग एक ही कानून के तहत जीवन-यापन करेंगे। चाहे लिव-इन हो या जीवन से जुड़ा कोई भी मामला , सब एक ही नियम से तय होगा। दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने असंभव को संभव कर दिया है। उनकी अध्यक्षता में जगदीशपुर में हुई कैबिनेट ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू करने को सहमति दे दी है।

समान नागरिक संहिता को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया से कहा कि भारत के संविधान में बताए गए एक समानता, बराबरी, न्याय और धर्मनिरपेक्षता के विज़न को साकार करने की दिशा में एक खास कदम है। इसे मध्य प्रदेश के निवासियों के लिए , चाहे उनका धर्म कोई भी हो, शादी, तलाक, वैवाहिक झगड़ों से जुड़े भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे निजी मामलों को नियंत्रित करने के लिए एक समान पर्सनल सिविल कानून लागू करने के मकसद से बनाया गया है। इस कोड का मुख्य मकसद महिलाओं की सुरक्षा और उन्हें सशक्त बनाना है, ताकि शादी, तलाक और उत्तराधिकार से जुड़े अलग-अलग पर्सनल कानूनों के तहत उनके साथ होने वाले पुराने भेदभाव को खत्म किया जा सके। उन्होंने कहा कि इन अलग-अलग और कभी-कभी बिना लिखित नियमों वाली प्रथाओं में सुधार करके और एक समान व निष्पक्ष ढांचा बनाकर, यह कोड पर्सनल सिविल कानून को आधुनिक बनाता है, ताकि पुरुषों और महिलाओं को समान अधिकार मिल सकें। साथ ही, यह धार्मिक रीति-रिवाजों, समारोहों और पारंपरिक प्रथाओं की भी साफ तौर पर सुरक्षा करता है, बशर्ते वे सार्वजनिक नैतिकता और नीति के अनुरूप हों।

*धर्मनिरपेक्षता के विजन के मद्देनजर बड़ा कदम*
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत के संविधान के भाग-4 में राज्य के नीति-निदेशक तत्वों के अंतर्गत अनुच्छेद 44 में यह उपबंध किया गया है कि राज्य भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा। इसके उ‌द्देश्य के परिप्रेक्ष्य में राज्य में विवाह, विवाह-विच्छेद, उत्तराधिकार तथा सहवासी-संबंध और उनसे संबंधित विषयों के विनियमन के लिए “मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता, 2026” का प्रारूप तैयार किया गया है। प्रस्तावित संहिता का उ‌द्देश्य विभिन्न व्यक्तिगत विधियों के अंतर्गत समान प्रकृति के नागरिक विषयों में प्रचलित भिन्नताओं को एक समेकित विधिक ढांचे में विनियमित करना तथा समानता, लैंगिक न्याय, गरिमा और विधि के शासन के संवैधानिक मूल्यों को प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के निवासियों के लिए एक समान पर्सनल सिविल कानून लागू करने के उद्देश्य से ‘समान नागरिक संहिता’ (Uniform Civil Code) का एक ऐतिहासिक ड्राफ्ट तैयार किया है। यह प्रस्तावित कोड भारत के संविधान में निहित एकसमानता, बराबरी, न्याय और धर्मनिरपेक्षता के विज़न को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस संहिता का मुख्य मकसद पर्सनल कानूनों के तहत महिलाओं के साथ होने वाले पुराने भेदभाव को खत्म करना, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना और उन्हें सशक्त बनाना है। पुरुषों और महिलाओं को समान अधिकार देने के साथ-साथ यह कोड उन धार्मिक रीति-रिवाजों और पारंपरिक प्रथाओं की साफ तौर पर सुरक्षा करता है जो सार्वजनिक नैतिकता और नीति के अनुरूप हैं। यह कोड उत्तराखंड (2024), गुजरात (2026) और असम (2026) के यूनिफॉर्म सिविल कोड के गहन अध्ययन और उनके मार्गदर्शन से तैयार किया गया है।

*सीएम डॉ. यादव ने बताईं संहिता की मुख्य विशेषताएं*
1- अनुसूचित जनजातियों को संरक्षण: संवैधानिक सुरक्षा-कवच का सम्मान करते हुए यह कानून संविधान के अनुच्छेद 342 और अनुच्छेद 366 (खंड 25) के तहत आने वाली अनुसूचित जनजातियों जैसे भील, गोंड, कोरकू, बैगा, सहरिया और भारिया पर लागू नहीं होगा। इसके अलावा, जिन समुदायों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा संविधान के भाग XXI के तहत की गई है, उन्हें भी इस कोड से विशेष रूप से बाहर रखा गया है। कोड का परिभाषा वाला हिस्सा इसके अधिकार क्षेत्र को तय करता है। उत्तराधिकार से जुड़े जिन शब्दों की परिभाषा इसमें नहीं है, उनके लिए ‘भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925’ के अर्थ मान्य होंगे।

2- विवाह और तलाक से जुड़े बड़े सुधार
बहुविवाह-तीन तलाक पर पूर्ण रोक: यह कोड सभी समुदायों में केवल एक ही शादी (मोनोगैमी) को अनिवार्य बनाता है। कोई भी व्यक्ति एक समय में केवल एक ही जीवित जीवनसाथी के साथ शादीशुदा रह सकता है। विवाह के लिए पुरुषों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं की 18 वर्ष तय की गई है। अमान्य सहमति और प्रतिबंधित रिश्तों (जब तक परंपरा की अनुमति न हो) के बीच विवाह पर रोक लगाई गई है। मौखिक तलाक या अनौपचारिक पंचायत के फैसलों को पूरी तरह गैर-कानूनी घोषित किया गया है। अब विवाह का समापन केवल कानून में बताए गए स्पष्ट और वैधानिक आधारों पर ही हो सकता है। मौजूदा व्यवस्था के विपरीत, अब महिलाओं को भी यह अधिकार दिया गया है कि यदि उनके पति ने शादी के समय किसी दूसरी महिला को गर्भवती किया है, तो पत्नी शादी को रद्द घोषित करने की मांग कर सकती है। लोगों के लिए शादी और तलाक दोनों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। शहरी क्षेत्रों में ‘MP ई-नगर पालिका पोर्टल’ और ग्रामीण क्षेत्रों में SDM, नगरपालिका या पंचायत के ज़रिए यह प्रक्रिया पूरी होगी। रजिस्ट्रेशन न होने से शादी अमान्य नहीं होगी, लेकिन रजिस्ट्रार द्वारा बिना ठोस लिखित कारण के आवेदन खारिज करने पर जुर्माने का प्रावधान है। तलाक के बाद उसी जीवनसाथी से दोबारा शादी करने के लिए ‘निकाह हलाला’ जैसी अपमानजनक या नीचा दिखाने वाली शर्तों को मानना, बढ़ावा देना या मजबूर करना एक दंडनीय आपराधिक अपराध माना जाएगा।

3- बच्चों के अधिकार और कस्टडी
‘अवैध’ शब्द की समाप्ति: संहिता ने एक प्रगतिशील कदम उठाते हुए कानूनी ढांचे से ‘अवैध’ (illegitimate) शब्द को पूरी तरह हटा दिया है। विवाहित या अविवाहित माता-पिता के बच्चों, जैविक, गोद लिए गए, सरोगेसी या असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) से पैदा हुए सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा प्राप्त होगा। कस्टडी से जुड़े किसी भी विवाद में माता-पिता के अधिकारों के मुकाबले “बच्चे का हित और सर्वांगीण भलाई” ही अदालत के फैसले का मुख्य और अनिवार्य आधार होगी।

4- उत्तराधिकार का एकसमान और जेंडर-न्यूट्रल ढांचा
लिंग-तटस्थ अधिकार: बेटों और बेटियों को संपत्ति के उत्तराधिकार में समान अधिकार दिए गए हैं, चाहे उनकी वैवाहिक स्थिति कुछ भी हो। मृतक की संपत्ति में विधवाओं और विधुरों के साथ भी समान व्यवहार होगा। जीवित माता और पिता दोनों को क्लास-1 का उत्तराधिकारी माना गया है, और वे मृतक बच्चे की संपत्ति में जीवनसाथी और बच्चों के साथ बराबर का हिस्सा पाएंगे। बिना वसीयत मरे व्यक्ति की संपत्ति को तीन वर्गों (क्लास-1, क्लास-2 और अन्य रिश्तेदार) में क्रमिक तरीके से बांटा जाएगा। पिछली पीढ़ियों के लिए एक ‘यूनिट सिस्टम’ और ‘सर्वाइवरशिप का अधिकार’ लागू किया गया है। यदि कोई व्यक्ति संपत्ति के मालिक की हत्या या उसमें मदद का दोषी है, तो वह विरासत से हमेशा के लिए अयोग्य हो जाएगा। यदि किसी का कोई कानूनी वारिस नहीं है, तो ‘एस्चीट’ सिद्धांत के तहत संपत्ति राज्य को हस्तांतरित हो जाएगी।

5- वसीयत (Will) की पूर्ण स्वतंत्रता
– एक नई धर्मनिरपेक्ष प्रणाली के तहत अब कोई भी स्वस्थ दिमाग का वयस्क अपनी 100% संपत्ति (स्वयं-अर्जित और पैतृक दोनों) वसीयत के माध्यम से किसी को भी दे सकता है। इससे पुरानी ‘अनिवार्य उत्तराधिकार’ की सीमाएं (जैसे इस्लामी कानून में एक-तिहाई की सीमा) समाप्त हो गई हैं। यह प्रक्रिया ‘भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925’ के तहत संचालित होगी।

6- लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य विनियमन (Live-in Relationship)
* अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए साथ रहने की शुरुआत के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रार के पास “लिव-इन रिलेशनशिप का बयान” जमा करना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। पार्टनर्स की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। वे प्रतिबंधित श्रेणी में न हों, पहले से विवाहित न हों और उनकी सहमति स्वतंत्र होनी चाहिए। यदि कोई पार्टनर 21 साल से कम उम्र का है, तो लिव-इन के शुरू होने और खत्म होने की जानकारी उनके माता-पिता-अभिभावकों को भेजी जाएगी। रजिस्ट्रार यह रिकॉर्ड स्थानीय पुलिस स्टेशन को भी भेजेगा।

7- महिला पार्टनर और बच्चों को सुरक्षा
– लिव-इन से पैदा हुए बच्चों को वैध माना जाएगा और उन्हें पूर्ण उत्तराधिकार मिलेगा। यदि पुरुष पार्टनर महिला को छोड़ देता है, तो वह सक्षम अदालत के माध्यम से कानूनी पत्नी की तरह ही भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) का दावा कर सकती है। बिना रजिस्ट्रेशन एक महीने से ज्यादा साथ रहने पर 3 महीने तक की जेल या 10,000 जुर्माना हो सकता है। गलत जानकारी देने पर 3 महीने की जेल और 25,000 जुर्माना तथा रजिस्ट्रार के नोटिस के बाद भी बयान न देने पर 6 महीने तक की जेल और 25,000 का जुर्माना हो सकता है।

Share this:

  • Share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp

Like this:

Like Loading…
Manish Gautam Chiefeditor

Manish Gautam Chiefeditor

Next Post
*माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर सरसवाही पहुंचकर जिला पंचायत सीईओ ने प्रदत्त सुविधाओं और व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर लिया जायजा*  *सुश्री कौर ने मूलभूत बुनियादी सुविधाओं, व्यवस्थाओं और आवश्यकताओं को चाक चौबंद और दुरुस्त रखने दिए आवश्यक निर्देश*

*माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर सरसवाही पहुंचकर जिला पंचायत सीईओ ने प्रदत्त सुविधाओं और व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर लिया जायजा* *सुश्री कौर ने मूलभूत बुनियादी सुविधाओं, व्यवस्थाओं और आवश्यकताओं को चाक चौबंद और दुरुस्त रखने दिए आवश्यक निर्देश*

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

© 2020 MP News Cast - Director Manish Gautam.

No Result
View All Result
  • About Us
  • Client Portal
  • Complaints and Feedback
  • Contact
  • Home 1
  • Privacy Policy
  • Privacy Policy
  • Rules and Regulations

© 2020 MP News Cast - Director Manish Gautam.

%d