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183 गांवों की बदलेगी तकदीर: बहोरीबंद माइक्रो उद्वहन परियोजना से खेतों तक पहुंचेगा पानी, 2029 तक आएगी सिंचाई क्रांति

by Manish Gautam Chiefeditor
July 12, 2026
in कटनी
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183 गांवों की बदलेगी तकदीर: बहोरीबंद माइक्रो उद्वहन परियोजना से खेतों तक पहुंचेगा पानी, 2029 तक आएगी सिंचाई क्रांति
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कटनी – वर्षों से मानसून की बेरुखी और सिंचाई के सीमित साधनों के कारण खेती की चुनौतियों का सामना कर रहे कटनी और जबलपुर जिले के हजारों किसानों के लिए अब उम्मीद की नई धारा बहने जा रही है। बहुप्रतीक्षित बहोरीबंद माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना को प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के साथ ही क्षेत्र में कृषि विकास और ग्रामीण समृद्धि के नए युग की शुरुआत मानी जा रही है।

करीब 1432.77 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली यह महत्वाकांक्षी परियोजना वर्ष 2029 तक पूर्ण होने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। परियोजना के तहत जल स्रोत से 17.35 क्यूमेक पानी का उद्वहन किया जाएगा, जिसके संचालन के लिए 25.15 मेगावाट विद्युत क्षमता का उपयोग किया जाएगा। आधुनिक तकनीक और व्यापक जल प्रबंधन पर आधारित यह योजना आने वाले वर्षों में क्षेत्र की कृषि व्यवस्था की दिशा और दशा दोनों बदलने का सामर्थ्य रखती है।

*183 गांवों के खेतों तक पहुंचेगा जीवनदायिनी जल*

परियोजना के माध्यम से कटनी और जबलपुर जिले के कुल 183 गांवों की 46 हजार 716 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। कटनी जिले के 167 गांवों की 44 हजार 334 हेक्टेयर भूमि तथा जबलपुर जिले की मझौली तहसील के 16 गांवों की 2 हजार 383 हेक्टेयर भूमि इस योजना से लाभान्वित होगी।

कटनी जिले में सर्वाधिक लाभ बहोरीबंद तहसील को मिलेगा, जहां 95 गांवों की 22 हजार 103 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। इसके अलावा स्लीमनाबाद के 48 गांवों की 15 हजार 303 हेक्टेयर, रीठी के 22 गांवों की 6 हजार 314 हेक्टेयर तथा कटनी तहसील के 2 गांवों की 613 हेक्टेयर भूमि को भी सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी।

*एक फसल से दो और तीन फसलों की ओर बढ़ेंगे किसान*

विशेषज्ञों के अनुसार परियोजना के पूर्ण होने के बाद क्षेत्र की खेती पूरी तरह बदल जाएगी। जिन खेतों में अभी तक केवल एक फसल ली जाती थी, वहां किसान अब वर्ष में दो से तीन फसलें लेने में सक्षम होंगे। खरीफ और रबी दोनों मौसमों में सिंचाई उपलब्ध होने से उत्पादन बढ़ेगा और मौसम की अनिश्चितताओं का असर कम होगा।

*नकदी फसलों और बागवानी को मिलेगा बढ़ावा*

पर्याप्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने के बाद किसान गेहूं, धान और चना जैसी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सब्जियां, दलहन, तिलहन और अन्य नकदी फसलों की खेती की ओर भी आगे बढ़ सकेंगे। इससे कृषि का स्वरूप बदलेगा और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति यह परियोजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान करेगी। निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे, वहीं कृषि आधारित उद्योगों और प्रसंस्करण इकाइयों के विकास की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन में कमी आने और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

*कृषि इतिहास में दर्ज होगा नया अध्याय*

जिला प्रशासन ने संबंधित एजेंसी को निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ कर निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। वर्ष 2029 में जब इस परियोजना का पानी खेतों तक पहुंचेगा, तब यह केवल एक सिंचाई परियोजना नहीं होगी, बल्कि हजारों किसान परिवारों के सपनों, उम्मीदों और आर्थिक सशक्तिकरण की मजबूत आधारशिला बनेगी।

बहोरीबंद माइक्रो उद्वहन परियोजना आने वाले वर्षों में कटनी और जबलपुर के कृषि इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है और क्षेत्र को जल-संपन्न तथा कृषि समृद्ध बनाने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

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