सालों से जलभराव और गंदगी से जूझ रहे मरीज, कलेक्टर की सख्ती के कुछ घंटों बाद हरकत में आया अमला
कटनी। जिला चिकित्सालय में जलभराव और जाम ड्रेनेज की समस्या कोई नई नहीं थी। बरसात शुरू होते ही अस्पताल परिसर में पानी भरने और गंदगी की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। सवाल यह उठ रहा है कि यदि कलेक्टर श्री आशीष तिवारी शुक्रवार को औचक निरीक्षण करने नहीं पहुंचते, तो क्या ड्रेनेज सुधार का काम शुरू होता?
कलेक्टर द्वारा निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को फटकार लगाने और तीन दिन में व्यवस्था सुधारने के निर्देश देने के कुछ ही घंटों बाद तकनीकी अमला अस्पताल पहुंच गया। ड्रेनेज का सर्वे शुरू हुआ, नालियों का निरीक्षण किया गया और सुधार कार्य भी प्रारंभ हो गया।
इस घटनाक्रम ने अस्पताल प्रबंधन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समस्या पहले से मौजूद थी, तो समय रहते समाधान क्यों नहीं किया गया? क्या प्रशासनिक सख्ती के बिना व्यवस्था नहीं जागती?
अब देखना होगा कि यह कार्रवाई केवल निरीक्षण तक सीमित रहती है या अस्पताल में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान भी होता है।


