MP NEWS CAST मनीष गौतम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर लगाए गए आरोपों को भाजपा ने बताया तथ्यहीन, दस्तावेजों के साथ रखी वस्तुस्थिति
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं उनके परिवार की संपत्तियों को लेकर एक मीडिया संस्थान द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के बाद भारतीय जनता पार्टी ने विस्तृत तथ्य प्रस्तुत करते हुए आरोपों को निराधार और भ्रामक बताया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि उपलब्ध राजस्व अभिलेखों, चुनावी शपथ-पत्रों और कंपनी रिकॉर्ड्स से स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री या उनके परिवार द्वारा मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद किसी प्रकार का अनुचित लाभ नहीं लिया गया है।
भाजपा द्वारा जारी तथ्यात्मक जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कृषि भूमि नवंबर 2023 से जून 2026 तक 17.967 एकड़ ही बनी हुई है। यह संपत्ति पहले से ही विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए शपथ-पत्र में घोषित की जा चुकी थी।
इसी प्रकार उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम दर्ज कृषि भूमि भी लगभग यथावत है। नवंबर 2023 में उनके पास 12.287 एकड़ भूमि थी, जो जून 2026 में 12.292 एकड़ दर्ज है। बताया गया कि अधिकांश भूमि वर्ष 2008 से 2019 के बीच खरीदी गई थी।
भाजपा ने सिद्धि विनायक देवकॉन प्राइवेट लिमिटेड को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यह कंपनी वर्ष 2008 में कृषि कार्यों के उद्देश्य से स्थापित की गई थी। डॉ. मोहन यादव और सीमा यादव वर्ष 2017 में ही कंपनी के निदेशक पद से हट चुके थे तथा मार्च 2026 में उन्होंने अपने सभी शेयर भी त्याग दिए। कंपनी के स्वामित्व वाली भूमि नवंबर 2023 में 68.43 एकड़ थी, जो जून 2026 में घटकर 65.69 एकड़ रह गई।
प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि वैभव यादव द्वारा ग्राम सांवरखेड़ी में खरीदी गई 16.38 एकड़ कृषि भूमि वर्ष 2019 से मार्च 2023 के बीच खरीदी गई थी। यह खरीद मुख्यमंत्री बनने से पहले तथा उज्जैन मास्टर प्लान-2035 के प्रभावी होने से पहले की गई थी।
शालिनी यादव द्वारा वर्ष 2025 में ग्राम गंगेड़ी में खरीदी गई लगभग 10 एकड़ कृषि भूमि को लेकर भी स्पष्ट किया गया कि यह भूमि मास्टर प्लान क्षेत्र से बाहर स्थित है और किसी व्यावसायिक या विकसित क्षेत्र में शामिल नहीं है।
भाजपा ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री के रिश्तेदार स्वतंत्र व्यावसायिक इकाइयों के रूप में कार्य करते हैं और उनके निजी निवेश अथवा व्यवसायिक निर्णयों को मुख्यमंत्री से जोड़ना उचित नहीं है।
मास्टर प्लान को लेकर लगाए गए आरोपों पर पार्टी ने कहा कि उज्जैन मास्टर प्लान-2035 मई 2023 से प्रभावी हो चुका था, जबकि डॉ. मोहन यादव 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री बने। ऐसे में मास्टर प्लान अथवा विकास परियोजनाओं को मुख्यमंत्री पद का लाभ लेकर प्रभावित करने के आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि संपत्तियों का संपूर्ण विवरण वर्ष 2023 के विधानसभा चुनावी शपथ-पत्र में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। इसलिए हितों के टकराव अथवा पद के दुरुपयोग संबंधी आरोपों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है।
भाजपा का दावा है कि परिवार की अधिकांश भूमि मुख्यमंत्री बनने से पहले खरीदी गई थी और प्रकाशित रिपोर्ट में तथ्यों को संदर्भ से अलग प्रस्तुत कर भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास किया गया है।


