भोपाल। राजधानी के अरेरा हिल्स स्थित अटल मूर्ति पार्क में शुक्रवार को एक अनोखा खगोलीय दृश्य देखने को मिला। नेशनल अवार्ड प्राप्त खगोल विज्ञान प्रसारक सारिका घारू द्वारा आयोजित “जीरो शैडो डे” कार्यक्रम में दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर कुछ क्षणों के लिए लोगों, पाइपों और अन्य वस्तुओं की परछाइयाँ लगभग पूरी तरह गायब हो गईं। अपनी ही परछाईं को पैरों के ठीक नीचे सिमटते देख लोगों में उत्साह और रोमांच का माहौल रहा।
सारिका घारू ने बताया कि पृथ्वी के अक्षीय झुकाव (Axial Tilt) के कारण कर्क और मकर रेखा के बीच स्थित स्थानों पर वर्ष में दो बार ऐसा अवसर आता है, जब सूर्य की किरणें ठीक सिर के ऊपर से गुजरती हैं। उस समय खड़ी वस्तुओं की परछाईं शून्य या लगभग शून्य हो जाती है, जिसे “जीरो शैडो डे” कहा जाता है।
उन्होंने बताया कि दक्षिण भोपाल क्षेत्र में उत्तरायण सूर्य के दौरान यह घटना 13 जून को दिखाई देती है। सूर्य के दक्षिणायन की ओर लौटने पर यह घटना 28 जून के आसपास दोबारा घटित होगी, हालांकि उस समय मानसून सक्रिय रहने के कारण इसे देख पाना कठिन हो सकता है।
बच्चों को खेल-खेल में समझाया विज्ञान
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों और युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना था। सारिका घारू ने सरल प्रयोगों के माध्यम से समझाया कि सूर्य की स्थिति बदलने से परछाई की लंबाई और दिशा कैसे बदलती है। उन्होंने कहा कि खेल-खेल में सीखी गई विज्ञान की बातें बच्चों के मन पर गहरी छाप छोड़ती हैं और उन्हें वैज्ञानिक सोच अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं।
कैसे किया गया प्रयोग
कार्यक्रम के दौरान एक सफेद कागज के ऊपर चार उल्टे कप रखकर उन पर पारदर्शी कांच की प्लेट स्थापित की गई। प्लेट के ऊपर एक खोखला पाइप पूरी तरह सीधा (वर्टिकल) रखा गया। दोपहर 12:20 बजे सूर्य की किरणें पाइप के भीतर से सीधे आर-पार निकल गईं और नीचे रखे कागज पर एक चमकदार गोलाकार प्रकाश दिखाई दिया। इस दौरान पाइप की परछाईं लगभग समाप्त हो गई, जो जीरो शैडो डे का प्रत्यक्ष प्रमाण था।
रविवार को भी मिल सकता है मौका
सारिका घारू ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति शुक्रवार को इस अद्भुत खगोलीय घटना को देखने से चूक गया है तो वह शनिवार और रविवार दोपहर के समय भी बहुत कम अंतर के साथ इस दृश्य का अनुभव कर सकता है। उन्होंने कहा कि सूर्य 21 जून को कर्क रेखा तक अपनी उत्तरायण यात्रा पूरी करेगा, इसलिए आने वाले दिनों में भी सूर्य की स्थिति में होने वाले बदलावों का अवलोकन रोचक रहेगा।
“जब शून्य हो गई परछाई, तब विज्ञान ने दिखाया सूर्य का अनोखा चमत्कार” — यही संदेश इस आयोजन के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया गया।


