पांढुर्णा। नगर पालिका की कार्यप्रणाली इन दिनों “आरे लड्डू-जारे लड्डू” जैसी दिखाई दे रही है। एक ओर नगर पालिका आम नागरिकों पर नियम-कायदों का पालन कराने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर रसूखदार लोगों के सामने पूरी तरह नतमस्तक नजर आ रही है।
मामला शहर के आबादी क्षेत्र स्थित पंढरी वार्ड एवं गुजरी क्षेत्र को जोड़ने वाले मार्ग का है, जहां दिनदहाड़े सड़क को तोड़कर ब्रेकरनुमा अवरोध खड़े किए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जिस क्षेत्र में यह कार्य किया जा रहा है, वहां स्थित एक अवैध ले-आउट एवं उसके संचालकों के विरुद्ध न्यायालय में प्रकरण लंबित है। इसके बावजूद वहां निवासरत कुछ प्रभावशाली इंजीनियर, डॉक्टर और व्यापारियों द्वारा सार्वजनिक सड़क पर मनमाने ढंग से हस्तक्षेप किया जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि सड़क तोड़े जाने की जानकारी होने के बावजूद नगर पालिका अध्यक्ष, संबंधित वार्ड पार्षद तथा मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) कोई कार्रवाई करते नजर नहीं आ रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि कोई सामान्य व्यक्ति सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाता तो तत्काल कार्रवाई होती, लेकिन रसूखदारों के मामले में प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
सड़क पर लगाए गए अवरोधों के कारण क्षेत्र के लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों एवं दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग अब जोखिम भरा बन गया है।
उठ रहे हैं कई सवाल
सार्वजनिक सड़क को तोड़ने की अनुमति किसने दी?
क्या नगर पालिका ने इस संबंध में कोई अनुमति जारी की है?
यदि कार्य अवैध है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
क्या प्रभावशाली लोगों के लिए अलग नियम लागू हैं?
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन एवं नगर पालिका से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा सड़क को तत्काल पूर्व स्थिति में बहाल कराने की मांग की है। नगर में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर कार्रवाई कब होगी और नगर पालिका अपनी जिम्मेदारी निभाएगी या नहीं।
महावीर वार्ड पार्षद सोनू बागड़े
मेरे संज्ञान में कोई जानकारी नहीं है अगर नगर पालिका से परमिशन ले ली गई है तो मेरे को जानकारी नहीं दी गई है।


