कटनी उत्पादक समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम हैं। यदि समूह संगठित होकर कार्य करें और अपने उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग तथा ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान दें तो स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर तक पहचान दिलाई जा सकती है। ये बातें जिला पंचायत की सीईओ सुश्री हरसिमरनप्रीत कौर ने जिला पंचायत के सभा कक्ष में आयोजित कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कहीं । सुश्री कौर ने कहा कि समूहों को आधुनिक विपणन तकनीकों को अपनाने, डिजिटल प्लेटफार्म का उपयोग करने तथा बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादन किया जा सकता है। जिला पंचायत सीईओ ने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक दौर में केवल उत्पादन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग और सशक्त ब्रांडिंग के माध्यम से ही उत्पादों को बेहतर बाजार मिल सकता है। उन्होंने समूहों को नवाचार के साथ कार्य करते हुए स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से आय में वृद्धि करने के लिए प्रेरित किया ।
कार्यशाला के दौरान विभिन्न उत्पादक समूहों द्वारा संचालित गतिविधियों, उनकी उपलब्धियों तथा सामने आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई । अधिकारियों द्वारा समूहों को व्यवसायिक दृष्टिकोण से कार्य करने, उत्पादन की गुणवत्ता बनाए रखने, बेहतर पैकेजिंग विकसित करने तथा उत्पादों को सीधे बाजार से जोड़ने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया गया। साथ ही समूहों को बताया गया कि संगठित रूप से कार्य करते हुए वे अपने उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाकर आय के नए अवसर प्राप्त कर सकते हैं। जिला पंचायत सभागार में मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अन्त”र्गत जिले में गठित 63 उत्पादक समूहों की एक दिवसीय समीक्षा सह कार्यशाला का आयोजन आशीष तिवारी कलेक्टर जिला कटनी के निर्देश पर किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विकासखण्डों से आए उत्पादक समूहों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला में समूहों की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई तथा उन्हें आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।
उन्होंने समूहों से सामूहिकता, नवाचार और आत्मविश्वास के साथ कार्य करते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक सीमा शुक्ला, संजय कुमार सोंधिया, प्रदीप कुमार जैन एवं अजय पाण्डेय के साथ ही विकासखण्ड प्रबंधक सूर्यप्रताप सिंह बघेल, उभय श्रीवास्तव, विवेक द्विवेदी, धर्मेन्द्र गुप्ता, जया कोष्टी एवं राजेश पाण्डेय उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त जिले के विभिन्न विकासखण्डों से आए बड़ी संख्या में उत्पादक समूहों के सदस्य, सीएलएफ के अध्यक्ष, सचिव भी कार्यशाला में शामिल हुए और अपने अनुभव साझा किए।
कार्यशाला के माध्यम से उत्पादक समूहों को व्यवसायिक दृष्टिकोण, गुणवत्ता प्रबंधन, ब्रांडिंग तथा बाजार से जुड़ाव के महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई, जिससे भविष्य में ग्रामीण उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने और समूहों की आय में वृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।


