कालापीपल(बब्लू जायसवाल)रंगों के त्योहार होली
सभी वर्ग खुशियों से मनाते है,इन सबके बीच चमचों की होली का कुछ अलग मजा होता है,जो ईमानदार प्रतिभाशाली और बुद्धिजीवियों के लिए बला होती है,इनकी आंखों में चालाकी और होठों पर मंद-मंद मुस्कान दूसरों के मन की बात निकालने में ये बहुत ही माहिर होते हैं,इनकी मीठी बोली और मन में कटुता यही इनकी विशेष पहचान होती,नेताओं की पसंद-नापसंद का विशेष रखतें हैं ध्यान,अपनी चाटुकारिता के बल पर कब तक टिकेगी इनकी ये झूठी शान और तलवे चाटकर कब तक बने रहेंगे ये लोग महान’कुछ ऐसा ही आलम इन दिनों नगर की राजनीति में चल रहा है,कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए कुछ विक्रम बने नेताओं ने अपनी पीठ पर अपने-अपने बेतालों को टांग रखा है,तो कुछ नेताओं ने राजनीति में अपने-अपने तोते पाल रखे हैं,मंच से भाई साहब कुछ बोलते हैं तो अपनी चाटुकारिता दिखाते हुए, चमचे बोलते,जो भाई साहब का आदेश वही करूंगा,राजनीति में भी चमचों की खासियत यह है कि वे अपने हिसाब का नेता स्वयं ढूंढ लेते हैं,वो उस नेता के लिए कितने उपयोगी हो सकते हैं,ये भी वे स्वयं ही बताते हैं,जैसे ही इन्हें अपनी पसंद का नेता मिलता है,स्वार्थसद्ध करने के लिए चिपक जाते हैं,एक दो नेताओं के खास लोगों को पकड़ लेते हैं और उनका हर तरह की सुख-सुविधा मुहिया करते हैं,इसी वजह से चमचों का महत्त्व राजनीति क्षेत्र में रहता है।
अंत में:-नेता अपनी राजनीति चमकाने के लिए चमचों को चौराहे-चौराहे पर उतारते है,ओर कांग्रेस से बीजेपी में शामिल चमचे,पहले भैय्या के खास हुआ करते थे अब वर्तमान में भाई साहब की शान में कसीदे पढ़ते हुए नजर आ रहे हैं,बुरा ना मानों होली है….!


