रीठी (कटनी,) स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में कुपोषित बच्चों के उपचार में गंभीर लापरवाही की शिकायतें अक्सर सामने आती हैं। बच्चों को भर्ती न करने, सुविधओं के अभाव और लापरवाही के कारण कई बार बच्चों की हालत और बिगड़ने या मृत्यु की खबरें सामने आती हैं। आदिवासी/ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण दर 2024-25 में हजार से अधिक रही है, जो व्यवस्था पर सवाल उठाती है।
*लापरवाही के मुख्य बिंदु और स्थितियां*
बच्चों की भर्ती में लापरवाही: गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) बच्चों को समय पर पुनर्वास केंद्र न लाना या वहां उपलब्ध सुविधाओं का उपयोग न करना एक गंभीर लापरवाही है, जिससे बच्चों की स्थिति और खराब होती है। दैनिक आधार पर बढ़ते मामले मैं आदिवासी इलाकों में कुपोषण से जूझने वाले बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है
कुपोषण से बच्चों की मौत के मामलों में स्वास्थ्य तंत्र और प्रशासन की विफलता उजागर होती है, जो समाज की संवेदनहीनता को भी दर्शाती है।
पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए 24×7 चिकित्सा उपचार, पुनर्वास और पोषण सहायता प्रदान करते हैं। इनकी मुख्य जिम्मेदारी बच्चों का इलाज, माताओं को शिशु आहार व स्वच्छता का प्रशिक्षण और फॉलो-अप के माध्यम से बच्चों को पूर्ण स्वस्थ बनाना है।
परंतु कर्मचारियों की लापरवाही से यह उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है। और सिर्फ औपचारिकता निभाते हुए लंबे-चौड़े बिल लगा अपनी जेबें भरी जाती है l
*पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) की प्रमुख जिम्मेदारियां:*
गंभीर कुपोषित बच्चों की बीमारियों (जैसे निमोनिया, दस्त) का इलाज और उनकी स्थिति को स्थिर करना।2-3 सप्ताह तक विशेष पौष्टिक आहार देकर बच्चों के वजन में 15% तक की वृद्धि करना। माताओं को शिशु के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य पदार्थों से ऊर्जा से भरपूर आहार बनाने का तरीका सिखाना। उचित स्तनपान, व्यक्तिगत स्वच्छता और बच्चों की देखभाल के तरीकों पर परामर्श प्रदान करना। डिस्चार्ज के बाद 15 दिनों के भीतर कुपोषित बच्चों का फॉलो-अप करना, ताकि वे पुनः कुपोषण का शिकार न हों।इन केंद्रों का मुख्य लक्ष्य समाज को गंभीर कुपोषण (SAM) से मुक्त करना और बच्चों के स्वास्थ्य को स्थायी रूप से सुधारना होता है।
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार
यहां पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) का चार्ट गंभीर कुपोषित (SAM) बच्चों के 10-15 दिनों के उपचार, स्वास्थ्य निगरानी और 4-6 महीने तक अनुवर्ती कार्रवाई (follow-up) को व्यवस्थित करता है। दैनिक भोजन (F-75/F-100), वजन की दैनिक निगरानी, टीकाकरण, माता की परामर्श और डिस्चार्ज के बाद 4-6 महीने की फॉलो-अप विज़िट शामिल है l
बच्चा कितना खा रहा है, इसकी निगरानी (100 मिलीलीटर में 100 किलो कैलोरी और 2.9 ग्राम प्रोटीन)। प्रतिदिन वजन मापकर 15% तक लक्ष्य वजन प्राप्त करना। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य पदार्थों से पौष्टिक आहार बनाने का प्रशिक्षण। देने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है l
वही इस मामले को लेकर प्रभारी जनपद अध्यक्ष प्रकाश साहू ने एक महीने पूर्व रीठी जनपद में हुई जनसुनवाई में शिकायत पत्र दिया था परंतु शायद वह आज भी ठंडे बस्ते मैं पड़ी हुई है l
हरिशंकर बेन


