नई दिल्ली। भारत के प्रशासनिक इतिहास में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यालय (PMO) जल्द ही अपने पारंपरिक स्थान साउथ ब्लॉक से हटकर नए सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स में स्थानांतरित किया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय इसी सप्ताह नए परिसर में शिफ्ट हो सकता है। खास बात यह है कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से लेकर अब तक सभी प्रधानमंत्रियों ने साउथ ब्लॉक से ही कार्य किया है। ऐसे में यह कदम ऐतिहासिक माना जा रहा है।
14 जनवरी को हो सकता है शिफ्टिंग
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री 14 जनवरी, मकर संक्रांति के दिन नए कार्यालय में स्थानांतरित हो सकते हैं। सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स को सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत विकसित किया गया है।
इस परिसर में
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)
कैबिनेट सचिवालय
राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS)
के लिए अलग-अलग आधुनिक इमारतें बनाई गई हैं।
पहले ही शिफ्ट हो चुका है कैबिनेट सचिवालय
सरकारी सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट सचिवालय सितंबर 2025 में ही सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स में स्थानांतरित हो चुका है। वहीं, NSCS के भी जल्द शिफ्ट होने की संभावना है। इससे पहले कैबिनेट सचिवालय राष्ट्रपति भवन परिसर से और NSCS सरदार पटेल भवन से संचालित हो रहा था।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा नया PMO
सूत्रों के मुताबिक, नई PMO बिल्डिंग अत्याधुनिक तकनीक और सुरक्षा मानकों से लैस होगी। इस कॉम्प्लेक्स का निर्माण लार्सन एंड टुब्रो द्वारा किया गया है, जिसे वर्ष 2022 में इसका ठेका मिला था।
नाम बदलने की परंपरा पहले भी
गौरतलब है कि वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सरकारी आवास ‘रेस कोर्स रोड’ का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग किया था। इसके बाद ‘राजपथ’ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ रखा गया। अब सेंट्रल विस्टा के तहत बने नए सचिवालय परिसरों को भी ‘कर्तव्य भवन’ नाम दिया गया है।
प्रशासनिक व्यवस्था में नया अध्याय
प्रधानमंत्री कार्यालय का यह स्थानांतरण न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, बल्कि यह केंद्र सरकार की कार्यसंस्कृति में भी एक नए युग की शुरुआत का संकेत देता है।


