लापरवाही पर सख्ती: 223 प्राचार्यों को जिला शिक्षा अधिकारी का नोटिस, एकतरफा कार्रवाई के संकेत
जिला में शैक्षणिक व्यवस्थाओं में लापरवाही को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी एस.के. कानुड़े ने कड़ा रुख अपनाया है। रविवार को जिले के 223 हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्यों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। खरगोन
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा यह कार्रवाई डिजी गवर्नमेंट अकाउंट में प्राप्त राशि का पूर्ण उपयोग न किए जाने पर की गई है। यह राशि विद्यालयों में साफ-सफाई, शौचालयों की मरम्मत, रंगाई-पुताई, लैब एवं लाइब्रेरी सुदृढ़ीकरण, स्मार्ट क्लास की स्थापना, कंप्यूटर-प्रिंटर क्रय तथा अन्य छात्रहित कार्यों के लिए स्वीकृत की गई थी। इसके बावजूद कई विद्यालयों द्वारा जिला स्तर से जारी निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
प्राचार्यों को निर्देशित किया गया है कि वे तीन दिवस के भीतर शत-प्रतिशत राशि खर्च कर इसकी जानकारी दें तथा विलंब का स्पष्ट कारण प्रस्तुत करें। जिन विद्यालयों में अब तक 70 प्रतिशत से कम व्यय हुआ है, उन्हें तत्काल खर्च सुनिश्चित करने को कहा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में प्रकरण उच्च कार्यालय को भेजा जाएगा और दोषी पाए जाने पर दो वेतनवृद्धियाँ असंचयी प्रभाव से रोके जाने की चेतावनी दी गई है।
इसी क्रम में छात्रवृत्ति वितरण में अनियमितता पर भी सख्त रुख अपनाया गया है। शासकीय एवं अशासकीय प्राथमिक, माध्यमिक, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में छात्रों की छात्रवृत्ति सही बैंक खातों में जमा न होने पर संबंधित प्राचार्यों व प्रभारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। निर्देश दिए गए हैं कि तीन से चार दिनों में फेल या डुप्लीकेट खातों की सूची संकलित कर नए खाते खुलवाए जाएं और ईपी 3.0 पोर्टल पर अद्यतन कर भुगतान प्रस्ताव भेजे जाएं।
इसके अतिरिक्त यू-डायस और ईपी 3.0 पोर्टल पर नामांकन में अंतर पाए जाने पर भी जिला शिक्षा अधिकारी ने नाराजगी जताई है। स्पष्ट किया गया है कि दोनों पोर्टलों पर नामांकन समान होना अनिवार्य है। समय रहते सुधार नहीं होने पर अशासकीय विद्यालयों की मान्यता समाप्त करने तथा शासकीय संकुल प्राचार्यों का वेतन रोकने जैसी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
जिला शिक्षा अधिकारी ने साफ शब्दों में कहा है कि किसी भी स्तर की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों की अनदेखी करने वालों पर एकतरफा कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।


