मध्य प्रदेश की वित्तीय सेहत 2025 में ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां विकास और कर्ज आमने-सामने नजर आ रहे हैं। साल के अंत तक राज्य सरकार पर कुल कर्ज ₹4.65 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है, जो कि वित्त वर्ष 2025-26 के कुल बजट ₹4.21 लाख करोड़ से भी ज्यादा है।
यानी साफ शब्दों में कहें तो राज्य पर बकाया कर्ज, पूरे साल के खर्च से ऊपर निकल गया है।
हर दिन ₹125 करोड़ की उधारी!
आंकड़े बताते हैं कि बीते करीब दो वर्षों में सरकार ने औसतन प्रतिदिन ₹125 करोड़ से अधिक कर्ज लिया है। यही कर्ज अब राज्य की आर्थिक दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा कारक बन चुका है।
सरकार का तर्क: कर्ज से बना विकास का ढांचा
राज्य सरकार का दावा है कि यह उधारी विकास के लिए जरूरी थी।
सिंचाई परियोजनाएं, बांध-नहर, ऊर्जा निवेश, सड़क और परिवहन सुधार, सहकारी समितियों व स्थानीय निकायों को ऋण—सभी इसी कर्ज से जुड़े हैं। सरकार के राजपत्र में यहां तक कहा गया है कि
“राज्य की भौतिक संपत्तियों का मूल्य, बकाया कर्ज से कहीं अधिक है।”
मुख्यमंत्री का दावा: 15% तक विकास दर
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 17 दिसंबर को विधानसभा के विशेष सत्र में कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य की विकास दर 14-15 प्रतिशत रही।
उन्होंने माना कि कर्ज का बड़ा हिस्सा पिछली सरकारों का है, लेकिन मौजूदा सरकार ने इसे विकास-उन्मुख निवेश में लगाया है।
वित्त मंत्री बोले: कर्ज रोका तो विकास रुकेगा
उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा भी साफ कर चुके हैं कि बुनियादी ढांचे और सामाजिक योजनाओं के लिए कर्ज जरूरी है, इसे अचानक रोकना विकास को नुकसान पहुंचा सकता है।
लाडली बहना: सबसे बड़ा वित्तीय दबाव
सामाजिक योजनाओं में सबसे बड़ा नाम लाडली बहना योजना का है।
₹1,250 से बढ़कर ₹1,500 प्रतिमाह
अब प्रति माह खर्च करीब ₹1,850 करोड़
सरकार का वादा: 2028 तक ₹3,000 और आगे चलकर ₹5,000 प्रतिमाह
हालांकि इस बड़े लक्ष्य की स्पष्ट समय-सीमा अभी तय नहीं है, लेकिन इसका सीधा असर राज्य के खजाने और कर्ज पर पड़ रहा है।
राजकोषीय घाटा 4.7% GDP तक
वित्त वर्ष 2025-26 में
कुल व्यय: ₹4.21 लाख करोड़
राजकोषीय घाटा: GDP का लगभग 4.7%
कर्ज से जुटाया गया बड़ा हिस्सा ब्याज और ऋण चुकाने में खर्च हो रहा है, जिससे विकास और नई योजनाओं के लिए संसाधन सीमित हो रहे हैं।
देश में 9वां सबसे ज्यादा कर्ज वाला राज्य
मार्च 2025 तक देश का कुल राज्य कर्ज ₹93.93 लाख करोड़ रहा।
मध्य प्रदेश का हिस्सा करीब 5%, और कुल कर्ज में देश में 9वां स्थान।
हालांकि कर्ज-GDP अनुपात 22.7% होने से स्थिति पूरी तरह बेकाबू भी नहीं मानी जा रही।
निष्कर्ष: विकास बनाम वित्तीय सावधानी
2025 मध्य प्रदेश के लिए मिश्रित संकेतों वाला साल रहा—
✔ तेज GDP वृद्धि
✔ सामाजिक योजनाओं का विस्तार
✖ बजट से ज्यादा कर्ज
✖ रोजाना बढ़ती उधारी
सरकार ज़ीरो-बेस्ड बजटिंग और तीन-वर्षीय वित्तीय योजना जैसे सुधारों की बात कर रही है, लेकिन सवाल अब भी कायम है—
क्या विकास की रफ्तार, कर्ज की रफ्तार से आगे निकल पाएगी?


