कटनी।
जिला प्रशासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा मैदानी कर्मियों एवं आम नागरिकों के लिए शीतलहर से जुड़े लक्षण, बचाव उपाय, क्या करें व क्या न करें संबंधी एडवाइजरी जारी की गई है।
दिसंबर-जनवरी के दौरान जिले में शीतलहर का प्रकोप प्रायः देखा जाता है। कई क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान 7°C या उससे कम दर्ज हो सकता है, जिससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। अत्यधिक ठंड से हाइपोथर्मिया और फ्रॉस्टबाइट जैसी शीतजनित बीमारियाँ, तथा गंभीर परिस्थितियों में मृत्यु तक की संभावना बन सकती है।
विशेष रूप से संवेदनशील समूह
- 65 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजन
- 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे
- हृदय व श्वसन रोग से पीड़ित व्यक्ति
- बेघर/खुले स्थानों पर रहने-काम करने वाले (निर्माण श्रमिक, सड़क किनारे व्यवसायी आदि)
शीतलहर क्या है?
न्यूनतम तापमान में अचानक गिरावट, ठंडी हवाएँ चलना तथा पाला/बर्फ जमने जैसी स्थितियाँ—इन्हें शीतलहर कहा जाता है।
शीतलहर के दौरान क्या करें (Do’s)
- रेडियो, टीवी व समाचार पत्रों से मौसम की जानकारी नियमित लें।
- पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें; कई परतों में वस्त्र धारण करें।
- सिर, गर्दन, हाथ-पैर ढकें; टोपी, मफलर, मोज़े व वॉटरप्रूफ जूते पहनें।
- गर्म व तरल पेय (चाय, सूप) लें; संतुलित आहार और विटामिन-C युक्त फल-सब्जियाँ खाएँ।
- ठंडी हवा से बचें; घर के भीतर रहें, अनावश्यक यात्रा टालें।
- बच्चों, बुजुर्गों, अकेले रहने वालों व असहाय व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखें।
- आवश्यक दवाइयाँ, ईंधन, पेयजल व जरूरी सामग्री पहले से रखें।
- ठंड से प्रभावित होने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें/निकटस्थ अस्पताल से संपर्क करें।
क्या न करें (Don’ts)
- अत्यधिक ठंड में खुले स्थानों पर अनावश्यक समय न बिताएँ।
- गीले कपड़े पहनकर न रहें; तुरंत सूखे कपड़े पहनें।
- हाइपोथर्मिया पीड़ित को मादक पेय न दें।
- गंभीर ठंड के लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें।
हाइपोथर्मिया व फ्रॉस्टबाइट के लक्षण
- तेज कंपकंपी, अत्यधिक थकान, भ्रम, बोलने में कठिनाई, नींद आना
- उँगलियों/कान/नाक में सुन्नता, रंग का सफेद/पीला पड़ना
- शिशुओं में ठंडी, लाल त्वचा व ऊर्जा की कमी
महत्वपूर्ण: हाइपोथर्मिया एक चिकित्सकीय आपात स्थिति है। प्रभावित व्यक्ति को तुरंत गर्म स्थान पर ले जाकर सूखे कंबल से ढकें और शीघ्र अस्पताल पहुँचाएँ।


