छिन्दवाड़ा/10 दिसंबर 2025/ कठिन परिस्थितियों में भी जनसामान्य को सुरक्षित रखने की दिशा में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएँ लगातार मजबूत होती जा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर जिला मुख्यालय तक, स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्थापित त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली और प्रशिक्षित मानव संसाधन का उद्देश्य यही है कि हर गंभीर रोगी को समय पर वह उपचार मिले, जो उसके जीवन के लिए निर्णायक हो। इसी व्यवस्था के चलते कई बार ऐसे क्षण आते हैं, जब चुनौती अत्यंत बड़ी होती है, लेकिन समर्पित स्वास्थ्यकर्मी उसे अपनी सेवा, दक्षता और सामूहिक प्रयासों से संभाल लेते हैं। हाल ही में जिले में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसने स्वास्थ्य तंत्र की संवेदनशीलता, तत्परता और मजबूत समन्वय को एक बार फिर प्रमाणित किया।
29 सितंबर 2025 को विकासखण्ड परासिया के ग्राम तीतरा की गर्भवती महिला श्रीमती शिवांगी पति आकाश कुशवाहा को अत्यंत गंभीर स्थिति में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र परासिया से जिला अस्पताल छिंदवाड़ा लाया गया। जाँच में उनका हीमोग्लोबिन स्तर मात्र 1.9 g/dl तथा प्लेटलेट काउंट केवल 20,000 पाया गया, जो माँ और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए जीवन-घातक था। जिला अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ और ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों ने तुरंत स्थिति की गंभीरता पहचानकर उपचार प्रारंभ किया तथा रक्त चढ़ाने सहित सभी आवश्यक परीक्षण करवाए। प्राथमिक स्थिरीकरण के बाद महिला को उच्च स्तरीय उपचार के लिए 4 अक्टूबर को नागपुर भेजा गया, किन्तु वहाँ जाँच पूर्ण होने से पहले वापस लौटने से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई।
दूसरी बार रेफरल पर रात्रि में भी अधिकारियों की सक्रियता- 13 अक्टूबर को मरीज की स्थिति बिगड़ने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र परासिया टीम ने पुनः जिला अस्पताल रेफर किया। इस बार भर्ती प्रक्रिया, गम्भीरता को देखते हुए देर रात तक सीएमएचओ डॉ. नरेश गोन्नाडे, डीएचओ-1 डॉ. धीरज दावंडे सहित वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में कराई गई। महिला को वार्ड में भर्ती कर निरंतर मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई, जिससे उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके।
आईसीयू में एक माह तक लगातार उपचार व निगरानी- 24 अक्टूबर को स्वास्थ्य स्थिति और खराब होने पर महिला को आईसीयू में शिफ्ट किया गया। भर्ती होने पर उनका डेंगु पॉजिटिव पाया गया, जिसके बाद आईसीयू टीम ने सीवियर डेंगु प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार शुरू किया। चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने लगभग एक माह तक निरंतर मॉनिटरिंग, नियंत्रित द्रव प्रबंधन, ब्लीडिंग एसेसमेंट तथा हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के अनुरूप देखभाल प्रदान की। इस पूरी अवधि में जिला अस्पताल प्रशासन द्वारा रक्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए गए, जिससे उपचार बिना किसी व्यवधान के सुचारू रूप से चलता रहा।
सफल प्रसव और महिला की स्वास्थ्य सुधार यात्रा- लगातार देखभाल और समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप 20 नवंबर को महिला की स्थिति प्रसव योग्य पाई गई और उनका सफल नॉर्मल डिलीवरी कराया गया। जन्मे शिशु का वजन 1.920 किलोग्राम रहा, जिसे सुरक्षा और विशेषज्ञ देखभाल के लिए एसएनसीयू में भर्ती किया गया। उपचार के बाद महिला का हीमोग्लोबिन स्तर 10 g/dl, प्लेटलेट काउंट 64,000 और डेंगू रिपोर्ट नेगेटिव पाई गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि उनका स्वास्थ्य पूरी तरह स्थिर हो चुका है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्रस्तुत किया उदाहरण- यह पूरा प्रकरण छिंदवाड़ा जिले की स्वास्थ्य प्रणाली की उस क्षमता और संवेदनशीलता को उजागर करता है, जिसमें समय पर निर्णय, समन्वित रेफरल व्यवस्था, आईसीयू स्तर की विशेषज्ञ देखभाल और जिला स्तरीय टीमवर्क मिलकर कठिन से कठिन परिस्थिति में भी जीवन रक्षा को संभव बनाते हैं। इसी के परिणाम स्वरूप प्रशासनिक मार्गदर्शन, चिकित्सकों की विशेषज्ञता और नर्सिंग स्टाफ की सतर्कता ने मिलकर एक उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला और उसके नवजात शिशु के जीवन को सुरक्षित किया।
*संवाददाता शुभम सहारे छिंदवाड़ा*


