कालापीपल(बब्लू जायसवाल)नगर में भू-माफिया किसी भेड़ से कम नहीं है,बल्कि खुलेआम दहाड़ते शेर बन चुके हैं, नियम कानून और राजस्व की नियमावली इनके सामने बच्चों का खेल लगती हैं,जब से विधानसभा चुनाव हुए हैं जबसे हालात पूरी तरह बिगड़ चुके हैं,शासकीय सर्वे नंबरों पर भी कॉलोनी काटने का खुला कारोबार चल रहा है वह भी प्रशासन की नाक के नीचे,
“सिस्टम की काली करतूतों का काला चिट्टा तैयार”
सरकारी रिकॉर्ड में सर्वे नंबरों की ऐसी हेराफेरी की गई है कि शासकीय भूमि को निजी बताकर,कॉलोनी काट दी गई या उस जमीन का व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है और हैरानी इस बात की है कि विभागों को इसकी भनक तक नहीं है,यूं कहें कि जिन्हें भनक है वो अन-जान बनने का नाटक कर रहे है,जब इस पूरे मामले की सच्चाई जानने की कोशिश की गई तो पता चला कि सन् 2004 मे जिस सर्वे क्रमांक के आदेश से रजिस्ट्री हुई
है,उसके किसी भी प्रकार कागजात न तहसील में है न ही
रजिस्टार कार्यालय में भी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं।
फाइलों में सोता प्रशासन,जमीन पर जागता माफिया ?
जब अधिकारियों से जानकारी मांगी गई तो हमेशा की तरह घिसा-पिटा जवाब थमा दिया जाता हैआप लिखित में शिकायत दीजिए,जांच की जाएगी कहने का मतलब यह कि सबके पास जानकारी है लेकिन कोई कार्यवाही को तैयार नहीं है,क्योंकि सभी जानते हैं कि यह खेल कितना बड़ा है और इसके तार कहां तक जुड़े हैं अब असली राज यहां छिपा है कि जिस भूमि पर कॉलोनी काटने का खेल चल रहा है वह मूल रूप से शासकीय है लेकिन कागजों में उसका सर्वे नंबर बदल दिया गया है,नंबर से नंबर पर बैठाने की जो सेटिंग चल रही है वह साफ तौर पर बताती है कि यह बिना अफसरों की मिलीभगत के संभव ही नहीं है ऐसा नहीं है कि यह खेल रातों रात शुरू हुआ यह योजनाबद्ध तरीके से वर्षों से तहसील में चल रहा है, पुराने अधिकारी जाते हैं नए आते हैं मगर गोरखधंधा रुकता नहीं है नाम बदलता है तरीका बदलता है मगर भ्रष्टाचार की जड़ें फैलती जाती है,भू-माफियाओं का कहना है कि हमने कुछ नहीं किया
सुनने में बड़ा अजीब सा लगता है,जब वही कॉलोनी बिना किसी अनुमति,बिना डायवर्सन या बिना टीएनसी के
धड़ल्ले से कालोनी काटी जा रही है और सर्वे नंबरों की अदला-बदली सामने आ रही है,तो यह केवल पल्ला झाड़ने जैसा नहीं लगता यह जानबूझकर भ्रम फैला देने की चाल है,पर्दे के पीछे वही लोग हैं जो दस्तावेज़ बदलते हैं,नंबरों को घुमाते हैं और जिनके निर्देशों पर पटवारी तहसीलदार गीत बदल देते हैं।हम तो फार्महाऊस बेचते हैं प्लांट नहीं बेचते..!


