उमरियापान | ग्राम पंचायत उमरियापान, जो कि अपनी शांतिपूर्ण और ग्रामीण जीवनशैली के लिए प्रसिद्ध है, इन दिनों एक गंभीर समस्या से जूझ रहा है। यहाँ के वार्ड क्रमांक दो के पंच फातिमा बी और वार्ड क्रमांक तीन के पंच हेमराज पटेल ने यह गंभीर मुद्दा उठाया है कि गाँव में गंदगी का अंबार लगा हुआ है और पाइपलाइन भी फूटी पड़ी हैं। यह स्थिति न केवल ग्रामवासियों के स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी है, बल्कि यह ग्राम पंचायत की स्वच्छता और विकास की दिशा में भी एक बड़ी बाधा बन गई है।
*गंदगी का अंबार, जिम्मेदार मौन*
ग्राम पंचायत उमरियापान में गंदगी की समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। पंच फातिमा बी और हेमराज पटेल के अनुसार, गंदगी के कारण न केवल गाँव का वातावरण खराब हो रहा है, बल्कि यह स्थानीय निवासियों के लिए भी कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रहा है। कचरे का ढेर और खुले में पड़ा हुआ कचरा न केवल बदबू फैलाता है, बल्कि यह मच्छरों और अन्य बीमारियों के पनपने का कारण बनता है। गाँव में साफ़-सफ़ाई के लिए लाखों रुपए का बजट जारी किया गया था, लेकिन ये पैसे कहाँ गए, इसका कोई ठोस जवाब नहीं है। पंच फातिमा बी और हेमराज पटेल ने
कई बार शिकायत की है, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए हैं। यह समस्या ग्राम पंचायत प्रशासन की लापरवाही और अक्षमता का परिणाम है, जो स्वच्छता और ग्राम विकास के लिए जिम्मेदार है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह स्थिति और भी विकट हो सकती है, और गाँव में स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो सकता है।
*पाइपलाइन की स्थिति*
गाँव में पाइपलाइन की स्थिति भी बहुत ही खराब है। फूटी पड़ी पाइपलाइन न केवल पानी की आपूर्ति में व्यवधान डाल रही है, बल्कि इसके कारण जलस्रोतों का भी नुकसान हो रहा है। पंच हेमराज पटेल के अनुसार, कई बार इस विषय पर शिकायत की गई है, लेकिन ग्राम पंचायत प्रशासन की तरफ से कोई सुधार नहीं किया गया है। यह स्थिति ग्रामीणों के लिए एक गंभीर संकट बन चुकी है, क्योंकि पानी की नियमित आपूर्ति में गड़बड़ी के कारण उन्हें शुद्ध पानी के लिए काफी संघर्ष करना पड़ रहा है।पाइपलाइन की खराब स्थिति को सुधारने की आवश्यकता है ताकि पानी की सही तरीके से आपूर्ति हो सके और ग्रामीणों को परेशानियों का सामना न करना पड़े। इसके अलावा, पाइपलाइन के खराब होने से गंदे पानी का रिसाव भी हो सकता है, जिससे पानी की गुणवत्ता पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
*स्वच्छता पर लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद सुधार क्यों नहीं हुआ?*
रिपोर्टर राजेंद्र कुमार चौरसिया धीमरखेडा कटनी


