पांढुर्णा/19 नवंबर 2025/ पांढुर्णा जिले के ग्राम तिगांव के प्रगतिशील कृषक श्री नरेन्द्र ठाकरे, पिता श्री शामराव ठाकरे, कुल 5.188 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि और 35 पशुओं के स्वामी हैं। वे पिछले कई वर्षों से आत्मा परियोजना के मार्गदर्शन में पूर्णत: जैविक खेती कर रहे हैं और आज क्षेत्र में सफल जैविक संतरा उत्पादक के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं।
कृषक श्री ठाकरे अपनी कृषि भूमि पर संतरा, मक्का, तुअर, कपास, मिर्च, शिमला तथा अन्य फसलों की खेती करते हैं। जैविक खेती को बढ़ावा देने हेतु उन्होंने अपने खेत में 30 से अधिक वर्गीपिट बनाए हैं जिनकी वर्मीकम्पोस्ट का उपयोग खेत में ही होता है। इसके अतिरिक्त उन्होंने एजोला के 4 टांके तैयार किए हैं जिनका उपयोग पशुचारे और वृद्धि उत्प्रेरक के रूप में किया जाता है। पशुओं के लिए नेपियर घास का उत्पादन भी निरंतर किया जा रहा है। कीट प्रबंधन के लिए वे पूरी तरह देसी उपाय—गौमूत्र, नीमकाढ़ा, सड़ा छाछ, पत्तियां आदि का प्रयोग करते हैं और रासायनिक उर्वरक व कीटनाशकों का बिल्कुल उपयोग नहीं करते।
उनके खेत में लगभग 2000 संतरे के पौधे लगे हैं, जिनसे उन्हें लगभग 15 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त होती है। इसके अलावा मक्का, तुअर और सब्जियों से उन्हें लगभग 2.5 लाख रुपये की अतिरिक्त आय होती है।
संतरे की उच्च गुणवत्ता, स्वाद, आकार और टेक्सचर के कारण इन्हें मंडी ले जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती—व्यापारी स्वयं खेत में ही खरीद लेते हैं। जैविक गुणवत्ता के कारण उन्हें लगभग 20% अधिक रेट प्राप्त होता है। साथ ही, रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और टॉनिकों का उपयोग न करने से वे प्रतिवर्ष लगभग 3 लाख रुपये की बचत भी कर लेते हैं।
वर्ष 2015-16 में आत्मा परियोजना अंतर्गत संचालित परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत ग्राम तिगांव के 50 कृषकों द्वारा ‘तिगांव जैविक समिति’ का गठन किया गया। इस समिति द्वारा न केवल जैविक खेती की जा रही है बल्कि अब जैविक संतरा विपणन भी प्रारंभ कर दिया गया है। योजना अंतर्गत पैकिंग मटेरियल और पंजीयन प्राप्त होने से समूह के जैविक संतरे की विशिष्ट बाजार पहचान (32/4) बन गई है, जिसका आने वाले वर्षों में बड़े स्तर पर विपणन किया जाएगा।
भविष्य में कृषक श्री ठाकरे का लक्ष्य है कि वे जैविक संतरे से दोगुनी आय प्राप्त करें। उनका समूह जल्द ही कृषक कंपनी बनाकर जैविक संतरा जूस उत्पादन शुरू करने की तैयारी में है, जिससे क्षेत्र के किसानों को नए रोजगार और आय के अवसर मिलेंगे।
कृषक श्री नरेन्द्र ठाकरे की यह यात्रा न केवल एक सफल कृषक की कहानी है, बल्कि जैविक खेती की शक्ति का ज्वलंत उदाहरण भी है। उनकी मेहनत, नवाचार और जैविक खेती के प्रति समर्पण कई किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
*संवाददाता शुभम सहारे पांढुर्णा*


