खंडवा जिले के सिहाड़ा गांव में भूमि विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। स्थानीय दरगाह परिसर के पास ग्राम पंचायत द्वारा अतिक्रमण हटाने और तार फेंसिंग तोड़ने का नोटिस जारी करने के बाद मामला वक्फ बोर्ड तक पहुंच गया। शिकायत के आधार पर मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड ने गांव की खसरा संख्या 781 के अंतर्गत दर्ज 1,40,500 हेक्टेयर भूमि को अपनी संपत्ति मानते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है।
वक्फ ट्रिब्यूनल ने इस संबंध में खंडवा कलेक्टर, ग्राम पंचायत सरपंच और सचिव को नोटिस जारी करते हुए 10 नवंबर को भोपाल में पेश होने के निर्देश दिए हैं। सिहाड़ा गांव में करीब 10,000 की आबादी और लगभग 1100 मकान हैं, जहां दोनों समुदायों के लोग निवास करते हैं। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि संबंधित भूमि सरकारी है और उस पर मकान व मंदिर भी निर्मित हैं। सरपंच प्रतिनिधि हेमंत चौहान ने इस मामले को न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी जताई है।
उधर, वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने कहा कि ट्रिब्यूनल की नोटिस की जानकारी उन्हें नहीं है। कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि वक्फ बोर्ड का दावा नोटिस के माध्यम से प्राप्त होने पर उसकी जांच की जाएगी। दरगाह कमेटी के कोषाध्यक्ष शेख शफी ने शिकायत में दावा किया है कि यह भूमि वक्फ संपत्ति के रूप में वर्ष 1989 के राजपत्र में दर्ज है और लगभग 300 वर्ष पुरानी है, जिसमें इमामबाड़ा, दरगाह और कब्रिस्तान शामिल हैं।
ग्राम पंचायत का कहना है कि वक्फ बोर्ड ने अब तक कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया है, इसलिए उनका दावा असंगत है। राज्य में यह पहला विवाद नहीं है। इससे पहले रायसेन जिले के मखनी गांव में भी ऐसे नोटिस जारी हुए थे, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ा।


