डॉ इंदु भूषण बाली
लाटरी अधिनियम 1998 समस्त भारत में विधिक रूप में दृढ़ता से लागू है, जो कहता है कि किसी भी प्रकार की लाटरी या लक्की (बम्पर) ड्रा अर्थात जुआ, जिसमें धन, वस्तु या लाभ का प्रलोभन देकर टिकट बेचे जाएं, मात्र सरकारी अनुमति के साथ ही वैध है। अनधिकृत लाटरी अपराध है और इसके लिए दंड निर्धारित है। इसका उद्देश्य समाज में असंवैधानिक लाभ और जुए से उत्पन्न भ्रष्टाचार को रोकना है। लेकिन कुछ बुद्धिजीवी इसे मात्र मनोरंजन मानकर अनदेखा करते हैं। यही विवाद वह विवाद है जिसे प्रेस कोर कॉउन्सिल ने अब माननीय जम्मू और कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती स्वरूप प्रस्तुत करने का निर्णय ले लिया है।
इसका विधिक आधार यह है कि यह लॉटरी अधिनियम 1998 धारा 2(बी) में कहा गया है कि लॉटरी का अर्थ है कि किसी योजना के अन्तर्गत किसी व्यक्ति को पुरस्कार, केवल भाग्य (CHANCE) पर आधारित हो और उसमें टिकट, कूपन या किसी दस्तावेज की बिक्री सम्मिलित हो, तो वह लॉटरी की परिभाषित श्रेणी में आता है। जैसे कई समारोहों में 250 रुपए प्रति टिकट के बसूले जा रहे हैं और यह भी स्पष्ट नहीं किया जा रहा है कि विक्रेताओं (EXECUTIVE COMMITTEE) ने उक्त बम्पर ड्रा की बिक्री की अनुमति केंद्र शासित प्रदेश सरकार से ली है या नहीं?
क्योंकि मेले को आधार बनाकर कुछेक बुद्धिजीवियों का मानना है कि लक्की ड्रा अर्थात बम्पर ड्रा के प्रत्येक टिकट को मात्र 250 रुपए में बेचकर निर्धारित मेले के लिए धन इकट्ठा करना संवैधानिक अपराध के दायरे में नहीं आता है। उनका कुतर्क है कि यह भारतीय सभ्यता और संस्कृति तथा संविधान का पवित्र भाग हैं। चूंकि हमारी परंपराओं में खेल और मनोरंजन का प्राचीन इतिहास रहा है। परन्तु प्रेस कोर कॉउन्सिल के राष्ट्रभक्त राष्ट्रीय सॅंरक्षक इंदु भूषण बाली का प्रश्न यह है कि जब ऐसा मनोरंजन समाज के लिए खतरा बन जाए, तब क्या इसे संवैधानिक रूप से वैध ठहराया जा सकता है?
उल्लेखनीय है कि द्वापर युग में शकुनि मामा ने महाभारत युद्ध इसी षड़यंत्र से रचा था जिसमें युधिष्ठिर जैसे धर्मात्मा ने अपने साथ अपने भाई बंधु और पत्नी भी दुर्योधन के समक्ष चौसर के पासों में हार दिए थे और अपनी ही पुत्रवधू “द्रोपदी के चीरहरण” का चरित्रहीन इतिहास रचा गया था। इतिहास साक्षी है कि उसी महासभा में भाई भीम ने अपनी अपनी धर्मपत्नी की साड़ी खींचने वाले भाई दुशासन की छाती का लहू पीने की प्रतिज्ञा ली थी और कुरुक्षेत्र युद्ध में उसका लहू पीकर प्रतिज्ञा पूरी भी की गई थी। इतिहास यह भी मानता है कि उक्त चीरहरण के कारण कुलगुरू कृपाचार्य, गुरु द्रोणाचार्य और भीष्म पितामह नैतिकता पर शर्मसार भी हुए थे।
यही इतिहास हमें चेतावनी देता है कि महाभारत में जुए के खेल ने कुरूवंश को नष्ट किया था, द्रौपदी का अपमान हुआ था और युवाओं के वर्तमान और भविष्य दांव पर लगा दिए थे। आज वही आपराधिक खेल ‘लक्की ड्रा’ के आधुनिक रूप में सामाजिक और विधिक संवेदनाओं पर हमला कर रहा है। इसके बावजूद कुछ पंजीकृत संस्थाओं, संगठनों और बिरादरियों की एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्य नागरिकों की चुप्पी का लाभ उठाकर लॉटरी अधिनियम 1998 का उल्लॅंघन करते हुए सार्वभौमिक अपराध कर रहे हैं।
लेकिन प्रेस कोर कॉउन्सिल अपने मौलिक कर्तव्यों में निष्ठावान है और उक्त प्रशासनिक एवं न्यायिक अपराध को रोकने हेतु पूरी तरह वचनबद्ध है। भले ही एग्जीक्यूटिव कमेटी अपने मौलिक कर्तव्य भूल जाए और लक्की ड्रा को लाटरी अधिनियम 1998 का उल्लंघन न मानकर, उसे मनोरंजन की हास्यास्पद संज्ञा दे। किन्तु प्रेस कोर कॉउन्सिल उच्च न्यायालय अथवा उच्चतम न्यायालय में सिद्ध कर देगी कि द्वापर युग के चौसर की भांति वर्तमान समय का लक्की ड्रा भी एक घिनौना षड्यंत्र है। इसलिए उक्त षड्यंत्र को उजागर कर षड्यंत्रकारियों को दंडित कराना अनिवार्य हो चुका है।
सकारात्मक दृष्टि से देखें तो यह चुनौती केवल लक्की ड्रा को रोकने के लिए नहीं, बल्कि एग्जीक्यूटिव कमेटियों के सदस्यों तथा युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनाने, संवैधानिक नियमों के प्रति जागरूकता फैलाने और नैतिकता को पुनः स्थापित करने का पवित्र प्रयास है। जब प्रेस कोर कॉउन्सिल न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी, तब यह संदेश देशभर में जाएगा कि विधि और नैतिक विवेक के बिना कोई भी कार्य समाज के हित में नहीं हो सकता।
अतः यह मात्र विधिक मामला नहीं है, बल्कि सामाजिक चेतना और संवैधानिक सुरक्षा का राष्ट्रीय संघर्ष है। लक्की ड्रा के टिकटों की असंवैधानिकता को उजागर करके हम केवल नागरिकों के भविष्य की रक्षा नहीं कर रहे हैं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और संविधान की गरिमा को भी सुरक्षित कर रहे हैं। प्रेस कोर कॉउन्सिल यह सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में कोई भी दुर्योधन असंवैधानिक लाभ लेकर किसी द्रौपदी का चीरहरण न कर सके।
अन्ततः माननीय महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी प्रेस कोर कॉउन्सिल के पास अपने मौलिक कर्तव्यों एवं अधिकारों को प्रमाणित करने का यही उचित समय है कि वह आपके माध्यम से “लक्की ड्रा” के नाम पर हो रहे जुए, लालच और भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करे, समाज को जागरूक करे और संविधान की रक्षा करे। अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि आप जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार को भी कड़े निर्देश दें कि कोई भी पंजिकृत संस्थान रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटी एवं संबंधित क्षेत्र के डिप्टी कमिश्नर के कार्यालय से अग्रिम अनुमति के कहीं भी लॉटरी अधिनियम 1998 का जानबूझकर उल्लॅंघन न करें। अन्यथा प्रेस कोर कॉउन्सिल प्रशासनिक ही नहीं बल्कि न्यायिक कार्यवाही करते हुए माननीय जम्मू और कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय अथवा उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर अपराधियों को दण्डित करवाएगी। सम्माननीयों जय हिन्द
प्रार्थी
डॉ. इंदु भूषण बाली
प्रेस कोर कॉउन्सिल का
राष्ट्रभक्त राष्ट्रीय सॅंरक्षक,
राष्ट्रपति पद का पूर्व प्रत्याशी, वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार, डाकघर एवं तहसील ज्यौड़ियॉं, जिला (जम्मू) जम्मू और कश्मीर पिनकोड 181202
मोबाइल 7889843859
ईमेल आईडी baliindubhushan@gmail.com


