कृषि विज्ञान केन्द्र कटनी में 02 अक्टूबर २०२५ को स्वच्छता ही सेवा अभियान का आयोजन किया गया यह कार्यक्रम केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉक्टर संजय वैशम्पायन के मार्ग निर्देशन में किया गया इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ आर.के मिश्रा, डॉ शशि गौर,,डॉ यति राज खरे, डॉ अर्पिता श्रीवास्तव, डॉ आर.पी बैन,डॉ के पी द्विवेदी डॉ संदीप चंद्रवंशी, प्रियंका धुर्वे ने कृषि एवं स्वक्छ्ता पर तकनिकी जानकारी दी केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ संजय वैशम्पायन ने कृषकों एवं कृषक महिलाओं को बताया कि यह भारत सरकार द्वारा की गई अनोखी पहल है जिसके अंतर्गत भारत देश को एक साफ एव स्वच्छ देश बनाने का निर्णय लिया गया है।उन्होंने बताया कि स्वच्छता का सीधा संबंध हमारे शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। तभी कहा जाता है कि एक स्वच्छ शरीर में ही एक स्वस्थ दिमाग का निवास होता है। अतः कृषक अपने घर से लेकर अपने फसल अवशेषों का प्रबंधन सही प्रकार से करें तो हम स्वच्छता के साथ-साथ कृषि में भी जैविक प्रबंधन कर कृषि को प्राकृतिक खेती से जोड़ सकते हैं।
केन्द्र के प्रसार वैज्ञानिक डॉ आर पी बैन ने बताया कि किस तरह जल का प्रबंधन कर जल को दूषित होने से बचा सकते हैं व जल स्त्रोत में जलस्तर बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कृषक अपनी कृषि में रसायानों का कम उपयोग कर अपने दैनिक जीवन में जहरीले कृषि रसायनों से होने वाले दुष्प्रभावों से बच सकते है।साथ ही उन्होंने कृषकों को स्वच्छता हेतु शपथ दिलाई और कृषकों को अपने आस-पास व अपने गांव में स्वच्छता अभियान चलाने पर जोर दिया। इस मौके पर जिले के प्रगतिशील कृषक भी शामिल थे। कार्यक्रम में कुल 50 कृषकों ने भागीदारी की। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा सफाई कर्मियों को भी सम्मानित किया गयाकेंद्र ने कृषकों और कृषक महिलाओं के साथ-साथ संस्थान के कर्मचारियों द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) में 2 अक्टूबर को स्वच्छता अभियान मनाया जाता है, जो भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए स्वच्छ भारत मिशन का एक हिस्सा है। यह अभियान 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलने वाले स्वच्छता ही सेवा (SHS) अभियान के अंतर्गत आयोजित किया जाता है, जिसका उद्देश्य देश को स्वच्छ और स्वस्थ बनाना है।
कृषि विज्ञान केंद्र में स्वच्छता अभियान के दौरान होने वाली गतिविधियाँ:
• शपथ दिलाना:-संस्थान के अधिकारी और कर्मचारी कृषकों को स्वच्छता की शपथ , जिसमें वे अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने का संकल्प लेते हैं।
• जागरूकता फैलाना:-कृषकों को घर से लेकर खेत तक स्वच्छता बनाए रखने के महत्व के बारे में बताया जाता है, ताकि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हो सके।
• जल प्रबंधन:जल को दूषित होने से बचाने और जल स्रोतों में जल स्तर बढ़ाने के तरीकों पर जोर दिया ।
• रसायनों के उपयोग में कमी:कृषकों को रसायनों का कम उपयोग करने और जैविक प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया गया है।
• कर्मचारियों का सम्मान:स्वच्छता अभियान के तहत सेवा देने वाले सफाईकर्मियों को भी सम्मानित किया । समुदाय की भागीदारी:कृषि विज्ञान केंद्र और स्थानीय कृषक भी स्वच्छता के लिए आयोजित कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक भाग लिए हैं।
हरिशंकर बेन


