कालापीपल(बब्लू जायसवाल)भाजपा जिला अध्यक्ष बने रवि पांडे को महिनों बीत गए हैं,लेकिन रणनीति तय करने और कार्यकारिणी का गठन करना महत्वपूर्ण होता है,किंतु अभी तक श्री पांडे केवल नेताओं,कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से”शिष्टाचार मुलाकातों”तक ही सीमित हैं।कार्यकर्ताओं में उत्साह तो है पर स्पष्ट दिशा नहीं दिख रही,यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या रवि पांडे संगठनात्मक कसौटी पर खरे उतर पाएंगे ? जिला कार्यकारिणी घोषणा नहीं होना,कई सवालों को जन्म देता है,इसके के कारण कार्यकर्ताओं मे तेजी से असंतोष फैल रहा है,जबकि प्रदेश में भाजपा की सरकार होते हुए भी राजनीतिक नियुक्तियों को गति नहीं मिल पा रही है,यहां बात कार्यकर्ताओं से लेकर जिला स्तर के नेताओं तक के बीच गूंज रही है,जिला कार्यकारिणी का गठन केवल औपचारिकता नहीं होता,बल्कि यह संगठन की रीढ़ हड्डी मानी जाती है,ऐसे में भाजपा जिला कार्यकारिणी की घोषणा होने वाली है,दावेदार भी इन दिनों सक्रिय नजर आ रहे हैं,बड़े नेताओं के आगे पीछे घूमने वाले सभी कार्यकर्ताओं को “जिला महामंत्री”का पद ही चाहिए,जो नेता कांग्रेस छोड़ बीजेपी आए उनको भी जिला महामंत्री का पद चाहिए,इसके लिए चापलूसी की सारी हदें पार कर चुके हैं,दावेदार अभी से राजनीतिक आकाओं की परिक्रमा और चरण वंदना करने में लगे हुए हैं,सवाल यहां उठता है कि किसको मिलेगा जिला महामंत्री का पद..चापलूसी करने वाले,दलाली करने वाले या निष्ठावान कार्यकर्ता को यहां तो समय ही बतायेगा..!
“कालापीपल पुलिस धर्म संकट में गाड़ियों पर हूटर बड़ी चुनौती”
इस समय कालापीपल पुलिस बड़े धर्मसंकट में है,नगर की रईस जादो की बिगड़ैल औलादें अपनी फोर व्हीलर गाड़ी पर आजकल हूटर एवं सायरन लगाकर पुलिस के सामने इतराते नज़र आते हैं,लेकिन बेचारी पुलिस सारा तमाशा देखती रहती है,यादि व्यवस्था सुधारने के लिए पुलिस जैसे ही कार्यवाही करतीं हैं,तो गाड़ी छुड़वाने के लिए राजनीतिक आकाओं के फोन पुलिस थाने में घनघनाने लगते हैं और राजनीतिक आकाओं के आगे पुलिस नतमस्तक होना ही पड़ता हैं और गाड़ियां छोड़ना पड़ती हैं,अब इन राजनीतिक आकाओं का क्या करे बेचारी पुलिस,क्योंकि कालापीपल पुलिस राजनीतिक आकाओं के फोन से काफी परेशान हो चली है,हालांकि राजनीतिक आकाओं के सम्मान के लिए,पुलिस को गाड़ी छोड़ना ही पड़ता हैं,लेकिन आकाओ को भी इस बात का
ध्यान रखना होगा कि नगर बिगड़ी व्यवस्था कैसे सुधर किया जाए ?


