👉👉🪷🪷यह परंपरा भगवान जगन्नाथ के भक्त माधव दास से जुड़ी है। *एक बार माधव दास बहुत बीमार थे और भगवान जगन्नाथ ने स्वयं उनकी सेवा कर रहें थे यह बात भक्त माधव दास समझ गए उनकी सेवा प्रभु हीं कर रहें हैं*🥲🥲 फिर भक्त माधव दास ने प्रभु से कहा आप मेरी सेवा कर रहें हैं यह ठीक नहीं हैं आप तो भगवान हैं मुझे ठीक क्यूँ नहीं कर देते जो आप मेरे लिए कष्ट सह रहें हैं।🥲🥲
🌟🌟भगवान ने कहा कि तुम्हारे भाग्य में 15 दिन की बीमारी और बची है 15 दिन में ठीक हो जाओगे लेकिन माधव दास ठीक करने की हठ करने लगे प्रभु ने बहुत समझाया लेकिन माधव दास नहीं माने तब प्रभु ने माधव दास को तो ठीक कर दिए *लेकीन अपने भक्त की बीमारी को अपने ऊपर ले लिए क्यूंकि कर्म के फल में परमात्मा भी हस्तक्षेप नहीं करते यहीं विधि का विधान हैं।*🥹🥹👏👏
🍁🍁🥹🥹तभी से, हर साल ज्येष्ठ पूर्णिमा के बाद *भगवान जगन्नाथ 15 दिनों के लिए बीमार होकर एकांतवास में चले जाते हैं अपने प्रिय भक्त की पीड़ा को अपने ऊपर ले लेते हैं *फिर रथ यात्रा से पहले स्वस्थ होकर भक्तों के दर्शन के लिए निकलते हैं।*🌹🌹
♨️♨️* *भगवान जगन्नाथ 26 जून को पूर्ण स्वस्थ होकर,,,27 जून रथ दोज को शाम 5 बजे श्री जगदीश मंदिर पुराना थाना दमोह से रथ यात्रा के दौरान श्री जगन्नाथ स्वामी बलभद्र जी अपनी बहिन सुभद्रा जी के साथ अपने प्रिय भक्तों को दर्शन देंगे* 👏
रथ यात्रा मार्ग – श्री जगदीश मंदिर पुराना थाना दमोह से टॉकीज चौराहा से बकौली चौराहा घंटाघर से उमा मिस्त्री तलैया ,बड़े पुल, महाकाली चौराहा से सिटी नाल से पुनः पुराने थाने पर यात्रा अपनी मौसी के निवास पर श्री जगन्नाथ स्वामी जी रुकेंगे।।
ॐ जय जगन्नाथ प्रभु🚩जय बलराम,, जय माता सुभद्रा,,🙏🙏


