आप जो खा रहे हैं, क्या वो वाकई सुरक्षित है। कहीं आप धीरे-धीरे स्लो प्वाइजन तो नहीं खा रहे,,। क्या आपके बच्चों की टिफिन में जो बिस्किट नमकीन है, वो एक्सपायरी तो नहीं? और क्या बाजार में बिकने वाला दूध, मावे तेल और अन्य खाद्य पदार्थ असली है या ज़हर का दूसरा नाम बन चुका है?
आज का हमारा सवाल लोगों में पढ़ती बीमारी और उनके स्वास्थ्य को लेकर की है ।
खाद्य विभाग आखिर क्यों नहीं करता मिलावटी और एक्सपायरी सामान पर नियमित जांच,,? क्या इसके पीछे व्यापारियों से मिलीभगत की कहानी छिपी है?”चलिए जानते हैं पूरी सच्चाई। भारत में हर साल लाखों लोग दूषित या मिलावटी खाद्य पदार्थों के कारण बीमार पड़ते हैं। दूध में डिटर्जेंट, मावे में सिंथेटिक केमिकल, मसालों में रंग और यहां तक कि मिठाइयों में भी जहरीले तत्व मिलाकर उन्हें आकर्षक और स्वादिष्ट बनाकर हमारे तक पहुंचा दिया जाता है।
जबकि विभाग उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के बारे में शिक्षित करता है, धोखाधड़ी से बचाता है,और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी काम और खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोकने के लिए नियमित जांच की जाती है । परंतु जब
हमने कटनी जिले की रिपोर्ट्स खंगाली, तो ये सामने आया कि
यहाँ जिले और क्षेत्र मैं की खाद्य दुकानों में महीनों तक कोई निरीक्षण नही किया जाता केवल तीज त्योहारों पर ही खानापूर्ति के लिए जांच होती है, और बाकी साल उदासीनता।
कभी कभार छापा मार के कार्यवाही कर जब नमूना लैब में भेजा जाता है, तो रिपोर्ट आने में 2-3 महीने लग जाते हैं। इस बीच दुकानदार समान बेच चुका होता है। मिलावटी और एक्सपायरी सामान का हमारे शरीर पर असर कितना खतरनाक हो सकता है । इस
डॉक्टर कहते है कि कैंसर, किडनी फेल्योर, लिवर डैमेज जैसी बीमारियों की जड़ यही मिलावटी खाद्य पदार्थ होते हैं। बच्चों में मानसिक विकास में बाधा आती है। कई बार तो तुरंत ही फूड पॉयजनिंग और मौत तक हो जाती है। वही
लोगो का कहना है की सरकार को तो टैक्स चाहिए, सेहत जाए भाड़ में,कभी कोई फूड इंस्पेक्टर आता ही नहीं। बस
त्योहारों में खानापूर्ति कर, बाकी समय तो चैन से सोते हैं।
और जब जांच नहीं होती तो मिलावटी सामान खुलेआम बिकता है,और विभाग चुप है, तो संदेह तो पैदा होता ही है कि व्यापारियों और अधिकारियों की मिलीभगत कहीं न कहीं ज़रूर है। कही न कही हमारे खाने में ज़हर परोसा जा रहा है और जिम्मेदार सो रहे हैं। अब वक्त है । जागरूक होने का, आवाज़ उठाने का और अपने अधिकारों के लिए लड़ने का । अगर आप भी मिलावटी या एक्सपायरी सामान बिकता देख रहे हैं, तो चुप न रहें शिकायत करें क्योंकि सवाल सिर्फ स्वाद का नहीं है आपकी ज़िंदगी का है ।
हरिशंकर बेन


