प्रेरणा गौतम
लेखक ,विचारक, पत्रकार
मध्यप्रदेश की मीडिया की दुनिया में कुछ वर्ष पूर्व एक अनजान गुमनाम चेहरे ने आर्ट फ़ोटो ग्राफी छोड़ कर मीडिया के स्वघोषित महाप्रभुओं के खिलाफ बहुत तीखे तेवरों के साथ प्रचंड प्रहार प्रारम्भ किए थे। चौंकाने वाली बात यह थी कि उस अनजान नौजवान गुमनाम चेहरे के प्रहारों से बुरी तरह तिलमिलाए चाटुकार महाप्रभुओं की बेचैनी और बिलबिलाहट सारी हदों को तोड़ने लगी थी। बहुत ताकतवर और कुख्यात लुटियन मीडिया के चाटुकारों की खिड़कियां दरवाजे और दीवार उस अकेले नौजवान चेहरे के प्रहार से जिस तरह दरकने लगे थे। *उसे देखकर स्व. दुष्यंत कुमार की वह पंक्तियां याद आने लगीं थीं कि…*
कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता,
एक पत्थर तो तबीअ’त से उछालो यारों।
जो कई बड़े खाँ इस गलतफहमी के नशे में धुत्त रहते ते कि प्रदेश का मुख्यमंत्री भी इससे और उसके सवालों से डरता है। उस मीडिया की खाल अपने बहुत तीखे सवालों और तथ्यों के हंटर से उस नौजवान ने जब बहुत बेरहमी से सरेआम खींचना शुरू की तो गलतफहमी का सारा नशा उतर गया था। उनकी बौखलाहट चरम पर पहुंच गयी थी। उस नौजवान के तीखे तार्किक तथ्यात्मक सवालों के हंटर की मार की जद में केवल मीडिया ही नही बल्कि युवा नस्ल वाला हर वो मीडियाई गुर्गा आया था जो स्वंय को पूरे देश की मीडिया का सफेदपोश ठेकेदार समझता था। राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के पक्षधर लेखकों विचारकों को बड़ी घृणा से “फ्रिंज एलिमेंट” और बिगोट कह कर उनका अपमान और तिरस्कार करता था?
हास्यास्पद यह है कि चापलूस औऱ विज्ञापन जीवी मीडिया के यही सफेदपोश ठेकेदार खुद को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सबसे बड़ा झंडाबरदार भी घोषित किए हुए थे। लेकिन राष्ट्रवाद और हिंदुत्व से संबंधित कोई भी विचार उन्हें बर्दाश्त नहीं था। दशकों तक भ्रष्ट सत्ताधीशों के पालतू रहे इन मठाधीशों के बदन पर चढ़ी हुई गलतफहमी और वैचारिक दोगलई की धूल की परत को उस नौजवान ने अपने तार्किक तथ्यात्मक सवालों के हंटर से जब झाड़ना शुरू किया तो मठाधीशों की धूल तो झड़ी ही झड़ी, कपड़े फटने तक की नौबत आ गयी। मैं आज से काफी पहले, 2-3 बार उस अनजान नौजवान के विषय में अपनी पोस्ट में लिख चुकी हूं जो आज मध्यप्रदेश मीडिया के सबसे चमकदार सितारों में से एक है। आज मीडिया में सक्रिय लगभग हर वह व्यक्ति उस नौजवान *राजेन्द्र सिंह जादौन* को भलीभांति जानता है, जिसे समसामयिक राजनीतिक सामाजिक विषयों, मुद्दों की गहन समझ है। उन विषयों, उन मुद्दों में जिसकी रुचि है। *राजेन्द्र सिंह जादौन के विषय में आज पुनः यह पोस्ट इसलिए लिख रही हूं क्योंकि *जादौन का आज जन्मदिन है
जादौन आज से नहीं कुछ सालो से उन के निशाने पर हैं जो सत्ता के अंधाधुंध दरबार में भरपेट पंजीरी जमकर खा रहे हैं।
कई बार ऐसा हुआ है कि मैं जादौन के विचारों से असहमत भी हुआ हूं। लेकिन जादौन की देश धर्म के प्रति निष्ठा पर मुझे कभी कोई संदेह नहीं हुआ। जादौन को मैंने वामपंथी, माओवादी, मोदी विरोधी, हिंदुत्व विरोधी कभी नहीं माना। और उनके सवालों से मैं पूर्णरत सहमत हूँ।
*जम्मदिन की हार्दिक शुभकामनाओ सहित आदरणीय राजेन्द्र सिंह जादौन जी*


