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रीठी सरकारी अस्पताल की अव्यवस्थाओं की पोल एक बार फिर खुल गई है। जहा दो वर्षीय बच्चे को लेकर एक पिता पानी पिलाने के लिए भटकता रहा, सुनाई आप बीती। जहाँ एक ओर सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे कर रही है, तो वहीं दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। ऐसा ही एक मामला कटनी जिले के रीठी सरकारी अस्पताल से सामने आया है, जहाँ भीषण गर्मी में मरीजों को पीने के पानी तक के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी में अस्पताल में पानी तक का इंतजाम नहीं है। हालात इतने खराब हैं कि मरीजों के साथ आए परिजन पानी की तलाश में इधर-उधर भटकते नजर आ रहे हैं।”आज एक भावुक कर देने वाला दृश्य तब सामने आया जब एक पिता अपने दो वर्षीय मासूम बच्चे को गोद में लेकर अस्पताल परिसर में पानी की तलाश में भटकता रहा। गर्मी से बेहाल बच्चा रोता रहा और पिता बार-बार अस्पताल स्टाफ से पानी के लिए गुहार लगाता रहा, लेकिन कहीं भी पीने के पानी की व्यवस्था नहीं दिखी। रीठी सरकारी अस्पताल में मरीजों और बच्चों के लिए पीने के पानी तक का इंतजाम नहीं है।मरीज अपने घर या परिजनो से पानी मगवाते है क्योंकि यहां बे राजा की फौज है । गर्मी में हाल बेहाल हो जाते हैं, कोई सुनवाई नहीं होती है ।”यह सिर्फ एक पीड़ित पिता की नहीं, बल्कि उन सभी गरीब और मजबूर मरीजों की कहानी है, जो इलाज की उम्मीद लेकर तो सरकारी अस्पताल आते हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं। अब देखने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग कब इस गंभीर लापरवाही पर ध्यान देता है।
या फिर पीने के पानी को लेकर विभाग की मिलीभगत होगी ।
हरिशंकर बेन


