रिपोर्टर सीमा कैथवास
नर्मदापुरम। जिला मुख्यालय नर्मदापुरम शहर एवं आसपास बड़ी संख्या में अवैध कॉलोनी का निर्माण हो रहा है। साथ ही भूमि पर अवैध कब्जे सहित रजिस्ट्री में हेराफेरी की गंभीर शिकायतें भी प्रशासन तक पहुंच रही हैं। सूत्रों की माने तो मिलीभगत से फर्जी तरीके से रजिस्ट्री का खेल भी चल रहा है, कई मामले तो दब जाते हैं परंतु पीड़ितों की कुछ शिकायतें प्रशासन तक पहुंचने से मामला गरमा गया है। ऐसा ही एक गंभीर मामला कमिश्नर,कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक सहित जनसुनवाई में पहुंचा है। इसके बाद से भू माफियाओ में खासी हलचल मच गई है। कलेक्टर द्वारा मामले की जांच की जवाबदारी एसडीएम नीता कोरी को दी गई है। आदर्श नगर निवासी घूड़नलाल आदिवासी ने कलेक्टर की जनसुनवाई में लिखित शिकायत कर अवगत कराया है कि भूमाफिया द्वारा मौजा किशनपुर उर्फ आदमगढ़ स्थित खसरा नंबर 65 /2 रकबा 1.64 एकड़ भूमि के भूखंडों को फर्जी तरीके से दोबारा बेचा जा रहा है। जिससे विवाद की स्थिति निर्मित हो रही है। उनके द्वारा 1200 वर्ग फीट का भूखंड पंजीकृत विक्रय पत्र के आधार पर खरीदा गया और नामांतरण कराया गया। जिसके एवज में उन्होंने प्रतिभूति कागज कारखाना होशंगाबाद से हाउस बिल्डिंग एडवांस भी लिया था, जो उनके द्वारा ऋण चुका दिया है । वह प्लॉट पर मकान बनाना चाहते हैं लेकिन रसूखदार लोग उन्हें मकान बनाने नहीं दे रहे हैं और परेशान कर रहे हैं।
शिकायत में घूडनलाल आत्मज छोटेलाल ने बताया कि मैने राजगृह निर्माण समिति मर्यादित होशंगाबाद से मौजा किशनपुर उर्फ आदमगढ स्थित खसरा नंबर 65/2 रकबा 1200 वर्गफुट का भूखण्ड़ पंजीकृत विक्रय पत्र 13.11.1997 में खरीद कर कब्जा प्राप्त किया एवं राजस्व प्रलेखों में नामांतरण कराया था। मेरे द्वारा हाउस बिल्डिंग एडवांस (एच.बी.ए) ऋण प्रतिभूति कागज कारखाना होशंगाबाद से लिया था, तथा उक्त भूखण्ड को मेरे द्वारा पंजीकृत बंधक विलेख से बंधक दिनांक 29.05.2010 को दस्तावेज क्रमांक 701 के माध्यम से बंधक कराया गया था, जिसे ऋण चुकाने के पश्चात बंधक मुक्त कराया जा चुका है, जिसकी मूल रजिस्ट्री मेरे पास है, जिस पर मैं मकान बनाना चाहता हूं, किंतु मुझे संजय राजपूत व अन्य लोग परेशान कर रहे है।
मौजा किसनपुर की भूमि खसरा नंबर 65/2 का संपूर्ण रकबा 1.64 एकड़ हुकमा एवं छोटेलाल वल्द हीरालाल ने राजगृह निर्माण समिति को दिनांक 01.07.1997 एवं 17.01.1997 को विक्रय कर दिया था, जिस पर राजगृह निर्माण समिति के द्वारा विभिन्न भूखण्डों को नियमानुसार विक्रय कर दिया गया तथा भूखण्ड़ नंबर 32 एवं 33 को शासन के पक्ष में बंधक रखा गया था, जिन्हें आज तक मुक्त नहीं कराया गया है, किंतु उक्त भूखण्ड़ों पर भूमाफियों ने पक्के मकान बना लिए है, इस तरह संपूर्ण भूमि विक्रय करने के बाद 19,650 वर्गफिट अधिक रकबा वर्ष 1998-99 के दौरान विभिन्न प्रभावशाली दबंग व्यक्तियों को हुकमा एवं छोटेलाल के द्वारा बेच दिया गया है, जिसके विक्रय की सूची संलग्न की जा रही हैं, इस तरह फर्जी विक्रय पत्र बनाकर एवं सरहदें बदलकर भूखण्ड़ बेचे गए हैं, जिसके कारण वास्तविक भूखण्ड धारक परेशान हो रहे हैं, तथा भूमाफियों ने राजगृह निर्माण समिति के द्वारा निस्तार हेतु छोडी गई भूमियों पर भी कब्जा कर लिया है, तथा खसरा नंबर 65/2 रकबा 1.64 एकड़ के डायवर्सन प्रकरण क्रमॉक 37/अ-12/वर्ष 1996-97 आदेश दिनाँक 15.04.1997 के समय संलग्न प्रस्तावित नक्शा के अनुसार भूखण्ड सरहदों का स्पष्ट खुलासा था, जिन्हें बदलते हुए अलग अलग स्थानों की सरहद दर्शित करते हुए फर्जी रजिस्ट्री कराई गई है। ऐसी स्थिति में मूल भूमि स्वामी हुकमा व छोटेलाल द्वारा डायवर्सन कराकर ले आउट अनुसार विक्रय व बंधक किए गए भूखण्डों की जॉच कराई जाना आवश्यक हैं, जिससे की पूरे फर्जीवाडे का खुलासा होना संभव होगा।


